दैनिक केसरिया हिंदुस्तान संवाददाता वीरू गौतम।
पीलीभीत। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने मौजूद अधिकारियों और फरियादियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ग्राम रूपपुर रैजना चक मुस्तकिल निवासी दिव्यांग किसान दुर्गाप्रसाद अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के समक्ष पहुंचे। किसान ने बताया कि बैंक ऋण का पूरा भुगतान करने के बाद भी उसकी खतोनी से ऋण की प्रविष्टि नहीं हटाई गई है, जिसके चलते उसे लगातार सरकारी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, तहसील परिसर से उसकी साइकिल भी चोरी हो गई, जिससे उसके लिए आवागमन का संकट खड़ा हो गया है। शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया और सबसे पहले फरियादी की स्थिति को समझा। जब उन्हें पता चला कि दुर्गाप्रसाद दिव्यांग हैं और सुनने में भी असमर्थ हैं, तो उन्होंने तत्काल जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को जनसुनवाई कक्ष में बुलाकर मौके पर ही शिकायतकर्ता को श्रवण यंत्र (कान की मशीन) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में श्रवण यंत्र उपलब्ध कराया गया, जिससे दिव्यांग किसान की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जनसुनवाई कक्ष में मौजूद लोगों ने भी जिलाधिकारी की इस संवेदनशील पहल की सराहना की। इसके बाद जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी सदर को निर्देशित किया कि बैंक ऋण की प्रविष्टि खतोनी से हटाने संबंधी शिकायत का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण कराया जाए, ताकि किसान को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने तहसील परिसर से चोरी हुई साइकिल के मामले को भी गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को दिव्यांग किसान को नई साइकिल उपलब्ध कराने के लिए तत्काल आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समयबद्ध और प्रभावी समाधान का माध्यम है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक शिकायत का पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि आमजन का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो।
जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने अन्य फरियादियों की शिकायतें भी गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक न्याय और योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। विशेष रूप से दिव्यांग, गरीब और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथसमाधान किया जाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। दिव्यांग किसान दुर्गाप्रसाद ने जिलाधिकारी द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि उनकी बात पूरी गंभीरता से सुनी गई और उस पर तुरंत निर्णय भी लिया गया जनसुनवाई में हुई इस त्वरित कार्रवाई को उपस्थित लोगों ने भी प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली का सकारात्मक उदाहरण बताया।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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