कुश्ती केवल एक खेल नहीं, बल्कि शक्ति, अनुशासन और अदम्य साहस का है प्रतीक: फारुख पहलवान तावडू में खिलाड़ियों ने बड़े ही उत्साह के साथ मनाया विश्व कुश्ती दिवस

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तावडू 23 मई -नीरज सोनी तावडू दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान।
तावडू क्षेत्र में शनिवार को विश्व कुश्ती दिवस खिलाड़ियों ने बड़े ही उत्साह, अनुशासन और अपनी कला के प्रदर्शन के साथ मनाय। इस मौके पर शहर के सोहना रोड बाईपास पर स्थित फारुख पहलवान अखड़ा में कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया। जहाँ पहलवान खिलाड़ियों ने अपने अपने दांव पेच दिखाये।
आपको बता दे कि हर वर्ष 23 मई को विश्व कुश्ती दिवस मनाया जाता है। यह दिन कुश्ती के समृद्ध इतिहास, खिलाड़ियों के समर्पण और अनुशासन को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। फारूक पहलवान अखाड़े के संस्थापक पहलवान फारुख ने बताया कि भारत में कुश्ती का इतिहास सदियों पुराना है। इसे ‘मल्ल-युद्ध’ के रूप में जाना जाता था। हालांकि अभी कुछ सालों पहले युवाओ में कुश्ती को प्रति रुझान काफी कम हो गया था। लेकिन अब दोबारा से क्षेत्र के युवाओं में कुश्ती को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। आज उनके अखाड़े में 50 पहलवान है। भारतीय पहलवान लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार की तरफ से भी कुश्ती खेल को बढ़ावा मिल रहा है। कुश्ती केवल एक खेल नहीं, बल्कि शक्ति, अनुशासन और अदम्य साहस का प्रतीक है। इस मौके पर जहाँ अखड़ा में कुश्ती का आयोजन किया ,वही खिलाड़ियों ने मिठाई बांट कर विश्व कुश्ती दिवस की शुभकामनाएं दी।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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