दैनिक केसरिया हिंदुस्तान महक बैरागी रिपोर्टर
कुरवाई-तहसील कुरवाई की ग्राम पंचायत विशनपुर में ग्रेवल सड़क निर्माण कार्य को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मुक्तिधाम से शिवराज सिंह के खेत की ओर बनने वाली ग्रेवल सड़क के लिए लगभग 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कार्य में 17 लाख रुपये से अधिक, यानी करीब 17 लाख 85 हजार रुपये की राशि निकाल ली गई और एक ही दुकान दांगी इंटरप्राइजेज को 17 लाख 85 हजार रूपए के बिलों का भुगतान भी कर दिया गया ,जबकि मौके पर निर्माण कार्य का कोई अस्तित्व दिखाई नहीं देता।
धरातल पर न सड़क बनी और न ही किसी प्रकार का निर्माण कार्य शुरू हुआ। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर लाखों रुपये की सरकारी राशि कहां खर्च कर दी गई। मामला और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि पिछले करीब दो वर्षों से इस कार्य का निरीक्षण नहीं किया गया। इससे ग्राम पंचायत एजेंसी और संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका भी साफ नजर आ रही है।
इस संबंध में कुरवाई जनपद पंचायत के सीईओ को लगभग 10 दिन पहले अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और न ही निर्माण कार्य चालू कराया गया।जब फिर से इस संबंध में कुरवाई सीईओ से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा मैंने काम शुरू करने के लिए बोल दिया है।और उन्होंने कहा कि मुझसे पूछकर पैसा नहीं निकाला है। पैसा पंचायत में आया है इसलिए मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता।
सीईओ का यह बयान कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि पंचायत में आने वाली सरकारी राशि के उपयोग और कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी प्रशासनिक अधिकारियों पर ही होती है।
वहीं ग्राम पंचायत विशनपुर के सरपंच से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल सड़क निर्माण का कार्य अभी शुरू नहीं हो पाएगा क्योंकि ग्रेवल सड़क के लिए सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पर आश्चर्य तो यह है कि 17 लाख 85 हजार रूपए निकाल लिए गए और ग्रेवल सड़क सामग्री का भुगतान भी कर दिया गया और शासकीय पोर्टल पर बिल भी लगा दिए गए अब सवाल यह है कि जब सामग्री का भुगतान हो गया है तो ग्रेवल सड़क की सामग्री कहां गई। और जब सामग्री ले ली गई है तो फिर सामग्री न मिलने का सवाल ही नहीं उठता। आश्चर्य की बात यह भी है कि पंचायत निर्माण कार्यों में इंजीनियर द्वारा मूल्यांकन रिपोर्ट देने के बाद ही अगली किश्त जारी की जाती है, लेकिन इस मामले में बिना किसी स्पष्ट मूल्यांकन और बिना धरातल पर कार्य दिखाई दिए ही लगातार राशि निकाली जाती रही। इससे पूरे भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
और जब इससे संबंधित जिला सीईओ से संपर्क करना चाहा पर संपर्क नहीं हो पाया ।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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