दिनेश शुक्ला
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
आलोट थाना क्षेत्र के चर्चित कृष्णपाल सिंह हत्याकांड में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। एक तरफ जहाँ पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने की तैयारी कर ली है, वहीं दूसरी तरफ ग्राम मुंज के सैकड़ों ग्रामीणों ने इस पूरी कार्रवाई को गलत बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने रतलाम पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम एक शिकायती आवेदन सौंपकर दावा किया है कि मृतक के परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई FIR पूरी तरह असत्य और मनगढ़ंत है।
ग्रामीणों का दावा है की “घटना के वक्त अलग-अलग जगहों पर थे आरोपी”
ग्राम मुंज के ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि घटना के दिन (19 मई 2026) नामजद किए गए पांचों व्यक्ति घटना स्थल पर एक साथ मौजूद ही नहीं थे। वे सभी अपने-अपने अलग-अलग कामों से विभिन्न स्थानों पर थे। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी अज्ञात कारण से कृष्णपाल सिंह ने खुद जहरीला पदार्थ खाया था, लेकिन मृतक के परिवार वालों ने जनसमूह लेकर थाने पर दबाव बनाया और आपसी रंजिश के चलते गाँव के निर्दोष लोगों को इस मामले में फंसा दिया।
निष्पक्ष जांच के लिए ‘कॉल डिटेल’ और ‘टॉवर लोकेशन’ का सहारा लेने की मांग
ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया जाए।
घटना के दिनांक, समय और स्थान पर पांचों आरोपी मौजूद थे या नहीं, इसकी पुष्टि उनके मोबाइल टॉवर लोकेशन से की जाए।
मृतक कृष्णपाल सिंह की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाली जाए, जिससे यह पता चल सके कि अंतिम समय में उसकी किससे बातचीत हुई थी और उसने किन परिस्थितियों में जहरीला पदार्थ खाया।
वहीं ग्रामीणो ने निवेदन किया है कि यदि मोबाइल टॉवर और CDR जांच में यह रिपोर्ट झूठी पाई जाती है, तो दबाव बनाकर झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले फरियादी के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए। इस आवेदन की प्रतिलिपियां अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) आलोट और नगर निरीक्षक थाना आलोट को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं।
पुलिस जहां एक ओर इस मामले को आपसी विवाद में जबरन जहर देकर की गई हत्या मानकर आरोपियों को न्यायालय में पेश करने जा रही है, वहीं ग्रामीणों के इस सामूहिक शिकायती पत्र और तकनीकी जांच (CDR/टॉवर लोकेशन) की मांग ने अब पुलिस के सामने मामले की दोबारा गहराई से पड़ताल करने की चुनौती खड़ी कर दी है। देखना होगा कि इस तकनीकी साक्ष्य की मांग पर पुलिस प्रशासन का अगला कदम क्या होता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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