दैनिक केसरिया हिंदुस्तान/ संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735
सामाजिक कार्यकर्ता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी की नई पहल
रायपुर अम्बिकापुर। व्यवस्था की खामियों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ एक नई डिजिटल जन-पहल की शुरुआत की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी ने अपने फेसबुक वाल के माध्यम से “गब्बर फाइल्स — सच का डिजिटल रिकॉर्ड” नामक वैधानिक डिजिटल मंच शुरू करने की घोषणा की है।
इस पहल का उद्देश्य आम जनता, पीड़ित व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, कर्मचारियों तथा ईमानदार अधिकारियों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना बताया गया है, जहां वे जनहित से जुड़े दस्तावेज़, शिकायतें और डिजिटल साक्ष्य साझा कर सकें।
अकील अहमद अंसारी ने अपने पोस्ट में कहा कि आज आम आदमी व्यवस्था से सबसे अधिक परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सड़कें केवल कागज़ों में बनती हैं, अस्पतालों में बेहतर इलाज नहीं मिल पाता और स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था कमजोर बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना रिश्वत कई लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं तथा लोग झूठे मामलों, ज़मीन फर्जीवाड़े और सरकारी लापरवाही से परेशान हैं।
पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि कई ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी भी सिस्टम के भीतर दबाव, स्टाफ पॉलिटिक्स, चमचागिरी और दलाली जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई लोग सच्चाई जानते हुए भी प्रताड़ना के डर से सामने नहीं आ पाते।
क्या है “गब्बर फाइल्स”
🟤अकील अहमद अंसारी के अनुसार “गब्बर फाइल्स” एक वैधानिक डिजिटल जनमंच होगा, जिसके माध्यम से —
🟤आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे
🟤पीड़ित व्यक्ति दस्तावेज़ और डिजिटल साक्ष्य साझा कर सकेंगे
🟤कर्मचारी एवं अधिकारी गोपनीय रूप से तथ्य उपलब्ध करा सकेंगे!
🟤प्राप्त दस्तावेज़ों का प्रारंभिक सत्यापन किया जाएगा!
🟤तथ्यात्मक और वैधानिक जांच के बाद संबंधित विभागों को सक्रिय करने का प्रयास होगा!
🟤जनहित से जुड़े मामलों को सार्वजनिक विमर्श तक पहुंचाया जाएगा!
पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और पूरी प्रक्रिया संवैधानिक मर्यादा एवं पारदर्शिता के दायरे में संचालित होगी। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यह मंच किसी प्रकार की हिंसा, धमकी, उगाही या गैर-कानूनी गतिविधियों का समर्थन नहीं करेगा।
सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से यह सवाल भी पूछा गया है कि क्या वे “सिस्टम में रहकर सिस्टम की सफाई” चाहते हैं और क्या केवल वायरल वीडियो के बजाय डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पोस्ट के अंत में अकील अहमद अंसारी ने संदेश दिया —
“गब्बर फाइल्स — अब सच दबेगा नहीं… दर्ज होगा।”
Author: Dainik kesariya Hindustan
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