स्मार्ट सिटी’ सतना बना गड्ढों का शहर: विकास के नाम पर बेतरतीब खुदाई, धूल में दम तोड़ रही जिंदगी

SHARE:

भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान
मुख्य मार्ग से गलियों तक मौत के जाल,आए दिन फंस रहे वाहन-गिर रहे लोग, करोड़ों का बजट कहां गया?
सतना,। खुद को स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल बताने वाला सतना शहर आज प्रशासनिक लापरवाही और बेतरतीब विकास कार्यों का जीता-जागता शिकार बन चुका है। करोड़ों रुपये के विकास बजट के बावजूद पूरे शहर को मानो खोदकर छोड़ दिया गया है। मुख्य मार्ग हों या मोहल्लों की गलियां, हर तरफ अधूरी खुदाई, उखड़ी सड़कें और जानलेवा गड्ढे आम नागरिकों के लिए नासूर बन गए हैं।
सड़कें कम, दुर्घटनाओं के जाल ज्यादा
शहर की स्थिति इतनी भयावह है कि सड़कें अब आवागमन का साधन कम और दुर्घटनाओं के जाल ज्यादा नजर आती हैं। तस्वीरें गवाही दे रही हैं – बाजार के बीचों-बीच 5 फीट गहरा गड्ढा जिसमें नाले का पानी बह रहा है, तो दूसरी ओर कीचड़ में आधी धंसी कार। आए दिन दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं, एंबुलेंस तक जाम और गड्ढों में फंस रही है।
धूल के गुबार में सांस लेना मुहाल
सुबह से शाम तक सड़कों पर उड़ती धूल ने शहर की हवा को जहरीला बना दिया है। बाजार में सब्जी-फल बेचने वाले दुकानदार से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चे तक मास्क लगाकर चलने को मजबूर हैं। डॉक्टरों के अनुसार धूल के कारण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और आंखों की एलर्जी के मरीजों की संख्या 40% बढ़ गई है। बुजुर्ग और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
एक बनाए, दूसरा खोदे’ – विभागों में जीरो समन्वय
सबसे बड़ा सवाल विभागों के बीच तालमेल पर उठ रहा है। नगर निगम सड़क बनाता है तो हफ्ते भर बाद जल विभाग पाइपलाइन के लिए उसे खोद देता है। टेलीकॉम कंपनी केबल डालने के नाम पर फिर गड्ढा कर देती है। न कोई मास्टर प्लान, न जवाबदेही। करोड़ों रुपये मिट्टी में मिल रहे हैं और खामियाजा जनता भुगत रही है।
जनता में आक्रोश: ‘यही है स्मार्ट सिटी?’
स्थानीय निवासी सुनील गुप्ता ने कहा, “स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगे हैं। सड़क पर चलें तो गड्ढा, घर में बैठें तो धूल। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है।” व्यापारी संघ ने भी चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन में सड़कें दुरुस्त नहीं हुईं तो आंदोलन करेंगे।
प्रशासन मौन, जवाबदार कौन?
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सतना को 1000 करोड़ से ज्यादा का बजट मिला है। बावजूद इसके न ड्रेनेज सुधरा, न सड़कें। मानसून से पहले यदि गड्ढे नहीं भरे गए तो आधा शहर जलमग्न हो जाएगा। शहरवासी पूछ रहे हैं – आखिर इस बदहाली का जिम्मेदार कौन?

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई

पिपरिया भाजपा कार्यालय में गूंजा संगठन मंत्र, जिला महामंत्री मुकेश चन्द्र मैना ने कसी कार्यकर्ताओं की लगाम पूर्व जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल और मंडल अध्यक्ष बलराम ठाकुर ने किया प्रभारी का भव्य स्वागत