सिवनी विशेष ब्यूरो रिपोर्ट दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
बरघाट क्या मध्यप्रदेश का प्रशासनिक नक्शा बदल चुका है क्या सिवनी जिले के बरघाट जनपद पंचायत को भारत के संविधान से अलग कर किसी निजी रियासत का दर्जा दे दिया गया है ये सवाल इसलिए क्योंकि यहाँ एक ऐसा अंगद बैठा है जिसके पैर उखाड़ने की जुर्रत न तो वक्त की लहरों में है न ही सरकारी आदेशों फाइलों में हम बात कर रहे हैं खंड पंचायत अधिकारी केवल सिंह परते की एक ऐसा नाम जिसने सरकारी सेवा की मर्यादाओं को जूती की नोक पर रख दिया है बीते डेढ़ दशक 15 साल से परते ने बरघाट की कुर्सी को अपनी पुश्तैनी जागीर समझ लिया है नियमों की अर्थी भ्रष्टाचार का राज्याभिषेक सामान्य सरकारी नियमों के मुताबिक तीन साल में तबादला एक अनिवार्य प्रक्रिया है लेकिन परते के मामले में नियम घुटने टेक देते हैं 15 साल का वनवास खत्म हो गया पर परते का राजवास जारी है आखिर इस कुर्सी में कौन सा कुबेर का खजाना गड़ा है जिसे परते छोड़ना नहीं चाहते
क्या बरघाट की सीमा पर आकर सरकार की तबादला एक्सप्रेस के इंजन फेल हो जाते हैं ठाठ नवाबी कमाई अघोषित एक सरकारी मुलाजिम की तनख्वाह हजारों में होती है लेकिन साहब के ठाठ किसी रसूखदार नवाब को भी मात दे दें ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आग की तरह फैल रही है कि विकास के नाम पर आने वाला सरकारी पैसा जनता की गलियों में कम और साहब कीतिजोरियों में ज्यादा खपाया जा रहा है जनता पूछ रही है क्या जांच एजेंसियों को मोतियाबिंद हो गया है या साहब के वैभव की चमक ने सिस्टम की आंखें चौंधिया दी हैं जब प्रदेश के मुखिया भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की हुंकार भरते हैं तो बरघाट में बैठा यह अघोषित तानाशाह उनके दावों की धज्जियां उड़ा रहा है यह प्रशासन की लाचारी है या फिर भ्रष्टाचार का कोई अभेद्य किला कौन है वो आका किसका है वरदहस्त स्थानीय गलियारों में अब दबी जुबान में नहीं बल्कि खुलेआम सवाल उठ रहे हैं बिना किसी ऊपरी सेटिंग और राजनीतिक संरक्षण के कोई अधिकारी एक ही जगह पर 15 साल तक कुंडली मारकर नहीं बैठ सकता कौन है वो सफेदपोश जो परते की ढाल बना बैठा है क्या मंत्री और उच्च अधिकारी इस महा-लूट के खेल में मूकदर्शक हैं या हिस्सेदार सावधान अब जनता के सब्र का बांध टूटने को है यह खबर महज एक सूचना नहीं बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ जनाक्रोश का शंखनाद है जो चंद रसूखदारों की जेब में कैद है अगर जल्द ही इस एकछत्र राज का अंत नहीं हुआ और उच्च स्तरीय जांच के जरिए परते के साम्राज्य को ध्वस्त नहीं किया गया तो बरघाट की जनता सड़कों पर उतरने को तैयार है
सवाल सीधे सरकार से है क्या लोकतंत्र में कोई अधिकारी नियमों से ऊपर हो सकता है या फिर मान लिया जाए कि बरघाट में कानून का नहीं केवल सिंह परते का सिक्का चलता है
Author: Dainik kesariya Hindustan
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