भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
वाटर कूलर बने शोपीस, ग्राउंड फ्लोर तक दौड़ रहे अटेंडर, प्रबंधन दे रहा सिर्फ आश्वासन
गरीबों पर महंगी बोतल का बोझ
रीवा। शहर के सबसे बड़े संजय गांधी अस्पताल में अव्यवस्थाओं ने सारी हदें पार कर दी हैं। भीषण गर्मी के बीच यहां भर्ती मरीज और उनके परिजन पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। तीसरी और चौथी मंजिल के वार्डों में पानी की व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है।
शोपीस बने वाटर कूलर: अस्पताल की ऊपरी मंजिलों पर लगे वाटर कूलर महीनों से खराब पड़े धूल फांक रहे हैं। नलों से एक बूंद पानी नहीं टपक रहा। प्यास बुझाने के लिए अटेंडर को 3-4 मंजिल सीढ़ियां उतरकर ग्राउंड फ्लोर तक भागना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को वार्ड में अकेला छोड़कर परिजन पानी के लिए भटक रहे हैं।
रात में हालात बदतर: परिजनों का आरोप है कि दिन में तो किसी तरह जुगाड़ हो जाता है, लेकिन रात के समय ग्राउंड फ्लोर तक जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। लिफ्ट बंद होने से सीढ़ियां ही सहारा हैं। मजबूरी में कई परिजन बाहर से 20-20 रुपये की महंगी पानी की बोतलें खरीद रहे हैं। गरीब मरीजों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है।
प्रबंधन की लापरवाही उजागर: लगातार शिकायतों के बाद भी अस्पताल प्रबंधन सुध लेने को तैयार नहीं है। पूछने पर सिर्फ तकनीकी खराबी और जल्द समाधान का रटा-रटाया जवाब मिलता है। महीनों से खराब वाटर कूलर ठीक नहीं कराए गए। सवाल यह है कि करोड़ों का बजट होने के बाद भी जब सबसे बड़े अस्पताल में पानी नहीं मिलेगा तो आम आदमी इलाज कराने कहां जाए?
Author: Dainik kesariya Hindustan
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