महिला आरक्षण विधेयक अस्वीकृत करना महिलाओं का अपमान है

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रिपोर्टर दिलीप माहेश्वरी
देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लाया गया महिला आरक्षण विधेयक, जिसे आधिकारिक रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है, लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा।
यह विधेयक पहली बार वर्तमान स्वरूप में 19 सितंबर 2023 को संसद के विशेष सत्र में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई, लेकिन इसके लागू होने को लेकर अभी भी समय और प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक को “नए भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाएगा और देश के विकास को नई गति देगा। प्रधानमंत्री ने इसे “नारी शक्ति को सम्मान देने वाला युगांतरकारी निर्णय” बताया।
1 महिला प्रतिनिधियों जिला पंचायत अध्यक्ष गोलू आकांक्षा जायसवाल ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए
भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों और विधायकों ने इस विधेयक का जोरदार समर्थन किया। उनका कहना है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। जनप्रतिनिधियों ने इसे “महिलाओं के अधिकारों की जीत” बताया।
2 महिलाओं के लिए लाया गया विधेयक अस्वीकृत करना महिलाओं का अपमान है-नविता जैन
महिलाओ को अधिकार मिले व सदन में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं पहुंचे इस बाबत विधेयक लाया गया था किन्तु लोकसभा में 33% आरक्षण का विरोध अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है, जैन समाज महिला मंडल की अध्यक्ष व मिनीमाता कन्या महाविद्यालय जनभागीदारी समिति की सदस्य नविता जैन ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि आज के समय में जब महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है, तब इस तरह के विरोध से समाज में गलत संदेश जाता है। यह सिर्फ महिलाओं का अधिकार नहीं, बल्कि समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जैन महिला मंडल समाज की अध्यक्ष व मिनीमाता कन्या महाविद्यालय की सदस्य, व भाजपा अल्प संख्यक की मंत्री नविता जैन ने यह भी कहा कि महिलाओं को जो हक और अधिकार मिलता तथा सदन में अधिक महिलाओं के पहुंचने से जो महिला समुदाय की बहुत सारी असमानता व न्याय संगत तथ्यों को रख सकती थी व उसे दावे के साथ स्वीकृत कराने में बहुमत दर्शित कर सकती थी
किन्तु विरोधी दल के द्वारा इस विधेयक को स्वीकृत नही करने पर हम इस विरोध की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत देश की प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को बराबरी का अवसर और सम्मान मिले।
” नारी शक्ति का सम्मान, भारत देश का अभिमान ” आज सम्पूर्ण महिला समुदाय ऐसे निर्णय से आहत व स्वयं को ठगा महसूस कर रहें है, पर इसका भविष्य में विपक्ष को कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा।
3 “विपक्ष ने पहले भी रोका, अब भी राजनीति कर रहा” सुनीता वर्मा
श्रीमती सुनीता वर्मा ने कहा महिला आरक्षण बिल हर हालत में पास होना चाहिए महिला आरक्षण का सबसे ज्यादा विरोध पहले विपक्षी दलों ने ही किया था।
उनका आरोप है कि वर्षों तक बिल अटका रहा क्योंकि विपक्ष में सहमति नहीं थी।
उन्होंने कहा कि आज वही दल महिलाओं के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
4 इंदु जांगड़े ने कहा
“प्रधानमंत्री की मंशा साफ, महिलाओं को मिलेगा हक”
नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।
5 श्रीमती रीता अशोक केसरवानी का
कहना है कि यह बिल महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण सुनिश्चित करेगा।
इसे “नारी शक्ति को सम्मान देने वाला कदम” बताया गया।
“संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी, इसलिए देरी”
भाजपा की महिला प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि बिल लागू करने के लिए
जनगणना
परिसीमन
जैसी संवैधानिक प्रक्रियाएं जरूरी हैं।
उनके अनुसार, यह देरी मजबूरी है, न कि जानबूझकर टालना।
“विपक्ष भ्रम फैला रहा है”
भाजपा की महिला नेताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जनता, खासकर महिलाओं को गुमराह कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत पर सवाल उठाना गलत है।
दावा किया कि सही समय पर महिलाओं को पूरा अधिकार मिलेगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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