जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए अलग कॉलम की मांग, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान/संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735

बिलासपुर | 27 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़िया समाज एवं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना, बिलासपुर के नेतृत्व में सोमवार को छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना में पृथक पहचान दिलाने की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे और भाषा, संस्कृति एवं अधिकारों के संरक्षण को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन के जिला संयोजक अनिल कुमार पाली ने आरोप लगाया कि भारत की जनगणना प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ी भाषा को लगातार हिंदी के अंतर्गत समाहित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ी भाषियों के साथ अन्याय है और उनकी सांस्कृतिक अस्मिता पर आघात है।
युवा अध्यक्ष मनोज कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी एक समृद्ध और व्यापक रूप से प्रचलित भाषा है, जिसे अलग पहचान मिलना उसका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप प्रत्येक क्षेत्रीय भाषा को संरक्षण एवं सम्मान मिलना चाहिए।
वहीं, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष शैलु ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को पृथक कोड एवं स्पष्ट पहचान नहीं दी गई, तो संगठन द्वारा चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
मुख्य मांगें: जनगणना में छत्तीसगढ़ी को पृथक भाषा के रूप में मान्यता, छत्तीसगढ़ी भाषा को अलग कोड प्रदान किया जाए, संवैधानिक संरक्षण एवं आधिकारिक दर्जा, भाषा आधारित योजनाओं में प्राथमिकता, संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ठोस नीति।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने “जोहार छत्तीसगढ़, जनगणना म छत्तीसगढ़ी के कॉलम जोड़व” जैसे नारों के साथ एकजुटता दिखाई।
संगठन ने इसे छत्तीसगढ़ की अस्मिता और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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