सांदीपनी विद्यालय में भड़का विवाद: प्राचार्य पर भेदभाव और मनमानी नियुक्तियों के आरोप, जांच के आदेश से मचा हड़कंप

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दिनेश शुक्ला
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान

भाजपा मंडल अध्यक्ष की शिकायत पर प्रशासन हरकत में, सांसद ने भी की निष्पक्ष जांच की मांग; अभिभावकों में बढ़ी चिंता
आलोट। आलोट के प्रतिष्ठित सांदीपनी विद्यालय में प्राचार्य फिरोज खान की कार्यशैली को लेकर उठे विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। छात्रों के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार, नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से स्थायी एवं अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने जैसे आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
भाजपा मंडल अध्यक्ष दिलीप सिंह डोडिया ने कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्तियां की गईं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं। साथ ही नियुक्त कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत रतलाम ने पत्र क्रमांक 3005/जिप./स्था./2026 दिनांक 26 मई 2026 के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) आलोट को एक सप्ताह में जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बाद एसडीएम आलोट ने पत्र क्रमांक 830/रीडर-1/2026 दिनांक 3 जून 2026 जारी कर विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) आलोट को निष्पक्ष जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन सौंपने के आदेश दिए।
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। उज्जैन-आलोट संसदीय क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया ने भी प्रभारी मंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहना अत्यंत आवश्यक है।
इधर, विद्यालय में चल रहे विवाद से अभिभावकों में भी असंतोष और चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि शिक्षा के मंदिर में यदि भेदभाव और मनमानी के आरोप लग रहे हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।
अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो शिक्षा व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए संबंधित प्राचार्य को तत्काल पद से हटाकर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई किया जाना आवश्यक माना जा रहा है। इससे न केवल व्यवस्था में जनता का विश्वास कायम होगा, बल्कि यह भी संदेश जाएगा कि शिक्षा संस्थानों में मनमानी और अनियमितताओं के लिए कोई स्थान नहीं है।

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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