सत्ता, सिस्टम और स्टे के बीच फंसी चार गांवों की जिंदगी

SHARE:

दिनेश शुक्ला
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान

बारिश आते ही कमला खेड़ी, सती खेड़ा, रावत खेड़ा और बर्डिया का संपर्क प्रभावित होने का डर, 12 किलोमीटर का सफर बन जाता है 21 किलोमीटर की मजबूरी
आलोट
विकास के दावों, योजनाओं और जनप्रतिनिधियों के भाषणों के बीच आलोट क्षेत्र के ग्राम कमला खेड़ी, सती खेड़ा, रावत खेड़ा और झार बर्डियाा आज भी एक बेहतर सड़क के इंतजार में हैं। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही हजारों ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि हर वर्ष बारिश आते ही यह मार्ग कीचड़, दलदल और गहरे गड्डों में तब्दील होकर लोगों की जिंदगी को मुश्किलों में धकेल देता है।
ग्रामीणों के अनुसार फिलहाल किसी तरह आवागमन जारी है, लेकिन तेज बारिश शुरू होते ही सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आने लगती है। जहां सामान्य दिनों में आलोट पहुंचने के लिए करीब 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, वहीं बारिश के दौरान लोगों को ग्राम भीम, कलसिया, गोयल और धापना फंटा होकर
लगभग 21 किलोमीटर लंबा रास्ता तय
करना पड़ता है। इसका सीधा असर विद्यार्थियों, किसानों, मजदूरों और मरीजों पर पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि हर वर्ष बारिश के दिनों में दोपहिया वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं, कई बार लोग गिरकर घायल हो जाते हैं और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना तक चुनौती बन जाता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जबकि किसानों को फसल मंडी तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि झार बर्डिया वर्तमान मंडल अध्यक्ष दिलीप सिंह डोडिया का गांव है और वे दूसरी बार मंडल अध्यक्ष बने हैं। इसके बावजूद वर्षों से सड़क की स्थिति नहीं बदल सकी। ग्रामीणों का कहना है कि जब संगठन और सत्ता से जुड़े गांवों तक विकास नहीं पहुंच पाया, तो दूरस्थ गांवों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के

अनुसार सड़क निर्माण में भूमि विवाद भी एक बड़ी बाधा बना हुआ है। बताया जा रहा है कि मार्ग से जुड़ी कुछ जमीन को लेकर पारिवारिक विवाद न्यायालय में लंबित है तथा संबंधित हिस्से पर न्यायालयीन स्थगन आदेश होने की बात सामने आ रही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग को कानूनी प्रक्रिया के तहत समाधान निकालकर जनहित में सड़क निर्माण का रास्ता तलाशना चाहिए, ताकि वर्षों पुरानी इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार मांग उठाई गई, ज्ञापन दिए गए और अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक समस्या पहुंचाई गई, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। हर वर्ष बारिश आते ही विकास के दावे कीचड़ में दब जाते हैं और ग्रामीण फिर उसी संघर्ष भरे रास्ते पर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment