नौशाद अहमद कुरैशी
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
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श्योपुर। कराहल जनपद की ग्राम पंचायत कराहल से जुड़े कथित फर्जी एमआईएस प्रकरण में जांच की सुस्त रफ्तार अब चर्चा का विषय बनती जा रही है। लगातार तीसरी बार जिला स्तरीय जनसुनवाई में पहुंचे इस मामले में अब तक न तो जांच रिपोर्ट सामने आई है और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई दिखाई दी है, जिससे शिकायतकर्ता समेत ग्रामीणों के बीच कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ता धीरज परिहार ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत कराहल में पदस्थ सहायक सचिव संदीप तोमर द्वारा मार्च 2026 में पांच तालाबों की पिचिंग से संबंधित करीब 40 लाख रुपये की एमआईएस रिपोर्ट तैयार की गई, जबकि संबंधित कार्य धरातल पर नहीं हुए थे। उनका आरोप है कि कथित रूप से फर्जी मस्टररोल और अन्य दस्तावेजों के आधार पर यह प्रविष्टियां की गईं। शिकायत के समर्थन में उन्होंने विभिन्न तकनीकी दस्तावेज और मौके की स्थिति से जुड़े प्रमाण भी प्रस्तुत किए हैं।
यह मामला पहली बार 9 जून की जनसुनवाई में सामने आया था, जिस पर कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा ने तत्काल जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद जनपद पंचायत कराहल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राकेश शर्मा ने सहायक यंत्री मधु जाटव और उपयंत्री ब्रज सिंह तोमर को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए दो दिन में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए थे। निर्धारित समय में रिपोर्ट प्राप्त नहीं होने पर 15 जून को जांच दल को पुनः स्मरण पत्र भी जारी किया गया, लेकिन 23 जून तक भी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा सकी।
लगातार 9 जून, 16 जून और 23 जून को जनसुनवाई में पहुंच चुके इस मामले को लेकर लोगों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद जांच में हो रही देरी के पीछे आखिर वजह क्या है।
शिकायतकर्ता धीरज परिहार का कहना है कि यदि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच होती है तो पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि जांच में हो रही देरी से संबंधित पक्ष को मौके पर आनन-फानन में निर्माण कार्य कराकर पूर्व में मार्च माह में तैयार की जा चुकी एमआईएस रिपोर्ट को सही साबित करने का अवसर मिल सकता है। उनका कहना है कि जिन कार्यों की एमआईएस प्रविष्टियां तीन माह पहले की जा चुकी हैं, यदि अब उनके निर्माण कराए जा रहे हैं तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए।
हालांकि मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान जिला पंचायत सीईओ सौम्या आनंद ने शिकायतकर्ता से चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम की तैयारियों के कारण वे अत्यधिक व्यस्त थीं, लेकिन कराहल पंचायत से जुड़ा यह मामला पूरी तरह उनके संज्ञान में है और अब इस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला वित्तीय अनियमितता और कूटरचना जैसे गंभीर पहलुओं से जुड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रमाणों के बावजूद शिकायतें लंबे समय तक फाइलों में उलझी रहेंगी, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों का मनोबल कमजोर होगा और व्यवस्था में सुधार के दावे भी सवालों के घेरे में आ जाएंगे।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच दल अपनी रिपोर्ट कब प्रस्तुत करता है और प्रशासन इस चर्चित मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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