भगवान के घर निर्दोष जाना लेकिन दोषी होकर मत जाना- कमलकिशोर नागर

SHARE:

दैनिक कैसरिया हिंदुस्तान धार से मैना मारू
चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव पर झूम उठे हजारों श्रद्धालु, लगे कृष्ण भयो नन्द लाल के जयकारे
बदनावर। हम डाक्टर, वकील की मानते है लेकिन महात्मा कह दे तो नहीं मानते है। सबकी नहीं मानते और महात्मा की मान लेते तो भव सागर पार हो जाते। लेकिन डुबोने वाले की मानते है
माँ, महात्मा एवं परमात्मा तीनों ने दिया है लेकिन तीनों की नहीं मानते है।नाम लिए बिना पापड़ न मिलें तो बिना नाम लिए परमात्मा कैसे मिल सकता है। धार की श्रद्धा धारदार है हम इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।घड़ी की दुकान पर घड़ी सुधारी जाती है, समय नहीं सुधारा जाता है। घड़ी की दुकान पर समय नहीं सुधरे तो हरि की द्वार पर चले जाना। समय सुधर जायेगा।
उक्त सारगर्भित विचार समीप गांव पंचमुखी में गोहिल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय कथा के चौथे दिन मालवी के प्रखर वक्ता व लोकप्रिय कथावाचक पंडित कमलकिशोर नागर ने व्यक्त किए।
नागर ने आगे कहा की गुरु के वचन ही आधार है। जीवन के अंत मे जिसने भी नाम लिया राम का ही नाम लिया क्योंकि सत्य भी यही है।सत्य साथ जाता है उसे कोई नहीं काट सकता है।जिस ने सब कुछ दिया सबको दिया वही राम नहीं बोलता है। अनपढ़ मजदूर अभिवादन में राम राम करेगा लेकिन जिले का पढ़ा लिखा मुखिया राम राम नहीं बोलता है। जैसे मंगलसूत्र में काले, लाल एवं पिले मोती भी है ये पिले मोती चाहे पांच, या आठ हो लेकिन उसकी सौभा पेंडल से है जों एक ही है। वैसे ही आप किसी भी के अनुयायी हो लेकिन अंत में सबके राम है।
निर्दोष शरीर में वासना नहीं होती है।
दुखी होकर मर जाना लेकिन दोषी होकर मत मरना। भगवान के घर जाना तो निर्दोष जाना, शरीर में पीड़ा परेशानी व दुख संतो को भी हुआ है। ऐसे आयोजन आपके पापों को नष्ट करने के लिए ही होते है निर्दोष शरीर में किसी प्रकार की वासना नहीं होती है।जिस दिन से पाप का छुटकारा अलग हो जाएगा उस दिन ज़िन्दगी ही अलग हो जाएगी‌।पुलिस द्वारा आपकी रोकी गाड़ी को कागज नहीं बताने पर बड़े व्यक्ति का नाम लेने पर छुट जाती है । तो परमात्मा का नाम लेने से तुम्हारी गाड़ी भव सागर से पार क्यों नहीं छुटेगी‌। जिस नाम से तुम्हारी गाड़ी छुटती है उसी का नाम नहीं लेना दुर्भाग्य की बात है।
व्यक्ति अवगुणो की चोरी करता है गुणों की नहीं
कथा के चौथे दिन बाल संत व मुख्य वक्ता नागर के पौत्र गोविन्द हाटकेश नागर ने मंगलवार को आधे घंटे की कथा में कहा की पुण्य करा,भजन करा हुआ,त्याग करी हुई भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। आपने त्याग भी कर दिया फिर भी फल नहीं मिला तुम समझते हो सब व्यर्थ गया। जब लकड़ी को जलाओ तो जलने लग जाती है।उसमें से धूंआ निकलता है उस धुंए से मच्छर भाग जाते हैं फिर अंगारे रोटी फिर राख से बर्तन धोते हैं। लकड़ी से राख भी व्यर्थ नहीं जाता तो आपकी भक्ति कैसे व्यर्थ जाएगी।।यंहा सबका उपयोग है परमात्मा ने आज नहीं लिया तो वो कल उपयोग लेगा।आपकी भक्ति व्यर्थ नहीं जाएगी। अच्छे काम जल्दी कर लेना चाहिए। निरोगी शरीर परमात्मा के भजन के लिए मिला है। जो अपशब्द बोलके धन कमा सकता है, तो मन्दिर में भजन कर हम चारभुजानाथ को कमा सकते है। व्यक्ति अवगुणों की चोरी करता है लेकिन गुणों की चोरी नहीं करता है।
कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया
कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया इसमें भगवान कृष्ण के प्रतिकात्मक के बाल रूप में 4 माह के योगेंद्र सिंह बोडानिया को श्रँगारित कर लाए। मंच पर आते ही कृष्ण कन्हैया लाल की जय के जयकारे लग गए एवं कृष्ण भजन पर पुरे पांडाल में श्रद्धालु भजन की थाप पर झूम उठे। कथावाचक नागर ने भी बालकृष्ण को दुलार किया।
जानकारी गोवर्धन सिंह डोडिया खिलेड़ी एवं महेंद्र सिंह चावड़ा ने दी।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment

best news portal development company in india
best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई