27 दिन के अनशन के बाद लखनऊ पहुंचे बांदा के पीड़ित किसान -निदेशालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू

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बांदा। जनपद के सैकड़ों पीड़ित किसान आज से प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा भवन स्थित चकबंदी निदेशालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। बांदा जिला मुख्यालय पर लगातार 27 दिनों तक चले क्रमिक अनशन और 9 दिनों के आमरण अनशन की जिला प्रशासन द्वारा अनदेखी किए जाने के बाद आहत किसानों ने अब सीधे शासन स्तर पर अपनी आवाज बुलंद की है।
किसानों का आरोप है कि बांदा चकबंदी विभाग भ्रष्टाचार, अभिलेखीय हेरा-फेरी और कागजी प्रगति दिखाकर शासन की आंखों में धूल झोंकने का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। प्रभावित ग्रामों लोहरा, अमलीकौर, बहिंगा, खपटिहा खुर्द, और महवरा के किसानों ने आरोप लगाया कि बांदा के चकबंदी अधिकारियों ने बिना पूरा सीमांकन किए ही शासन को सीमांकन पूरा होने की झूठी रिपोर्ट भेज दी। यहाँ महज 50प्रतिशत सीमांकन होने के बावजूद 25 मई 2026 को शासन को 100प्रतिशत कब्जा परिवर्तन की फर्जी रिपोर्ट भेजी गई। यहाँ भी आधे-अधूरे काम के साथ 30 जून 2026 को फर्जी कब्जा परिवर्तन रिपोर्ट भेजकर शासन को पूरी तरह गुमराह किया गया।
पीड़ित किसानों ने बताया कि वे न्याय के लिए मुख्यमंत्री जनता दर्शन, सीएम पोर्टल, समाधान दिवस, चित्रकूट मंडलायुक्त और बांदा जिलाधिकारी के चक्कर काटकर थक चुके हैं। चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त ने अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी, लेकिन उसका परिणाम श्ढाक के तीन पातश् रहा। किसानों द्वारा चकबंदी आयुक्त कार्यालय के घेराव के बाद बंदोबस्त चकबंदी मुख्यालय की अध्यक्षता में एक और कमेटी बनी, जिसने 2 महीने में जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन जांच आज तक अलमारियों में ही कैद है।
शिकायतों की संक्षिप्त जांच में कई गंभीर वित्तीय व पदीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें शह दी जा रही है। पैलानी, बहिंगा और अमलीकौर के चकबंदी अधिकारी नियम विरुद्ध काम करने, आदेशों में कटिंग करने और स्वेच्छाचारिता के दोषी पाए जा चुके हैं। एसीओ आजाद और अजय पर आरोप है कि उन्होंने क्रेता-विक्रेता की अनुपस्थिति में, ग्राम प्रधान और चकबंदी सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर कर नामांतरण वाद पारित कर दिए। इनमें कई ऐसे खातेदार भी शामिल हैं जिनकी मृत्यु दशकों पहले हो चुकी है।
जहाँ केवल साधारण त्रुटि सुधार का अधिकार है, वहाँ नियमों को ताक पर रखकर दर्जनों नए चक सृजित कर दिए गए। बीहड़ भूमि पर मालियत लगाकर नए चक बना दिए गए और इस खेल को छुपाने के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री तक नहीं की गई। इस मामले में बांदा के चकबंदी अधिकारी का पेशकार दोषी पाया जा चुका है। ग्राम सिलेहटा के काश्तकार जमुना प्रसाद के गाटा को बदलकर उन्हें भूमि से बेदखल कर दिया गया और दूसरे व्यक्ति को दोहरा लाभ पहुंचाया गया। लखनऊ में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने को गति देने उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री व पूर्व राज्यसभा सांसद विशंभर निषाद धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन करते हुए चकबंदी आयुक्त से भ्रष्ट और दोषी कर्मचारियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त करने की मांग की।
पूर्व मंत्री विशंभर निषाद ने कहा कि किसानों के अस्तित्व की लड़ाई है। बांदा में कागजी तरक्की दिखाकर प्रदेश में नंबर वन आने की होड़ में किसानों को उजाड़ा जा रहा है। अगर सरकार ने जल्द मांगों को नहीं माना, तो इस गूंगी-बहरी सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर तक किसानों की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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