अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन सुनिश्चित करने के निर्देश, मत्स्य एवं ग्रामीण विकास विभाग मिलकर करें कार्य

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धर्मेन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने लंबित आवेदनों की समीक्षा बैठक के दौरान जिले के अमृत सरोवरों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्य विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से कार्य करते हुए सभी उपयुक्त अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन प्रारंभ कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि अमृत सरोवर केवल जल संरक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि उनका उपयोग ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए भी किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे सभी अमृत सरोवरों का सर्वे कर मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त जलाशयों का चिन्हांकन करने तथा आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्ययोजना बनाकर अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन गतिविधियों को समयबद्ध तरीके से शुरू कराएं, ताकि ग्रामीणों एवं मत्स्य पालकों को इसका लाभ मिल सके और अमृत सरोवरों का बहुउद्देशीय उपयोग सुनिश्चित हो।मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की पहल, जिले के 244 तालाब पट्टे पर दिए जाएंगे
विदिशा जिले में वर्ष 2026-27 के लिए मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तालाब एवं जलाशयों के पट्टा आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। इस वर्ष जिले में कुल 244 तालाबों एवं जलाशयों का पट्टा आवंटन किया जाएगा, जिनका कुल जलक्षेत्र 2290.54 हेक्टेयर है। इससे मत्स्य सहकारी समितियों, स्व-सहायता समूहों तथा पात्र मत्स्य पालकों को रोजगार एवं आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।जारी जानकारी के अनुसार जिले में 224 ग्रामीण तालाब उपलब्ध हैं, जिनका कुल जलक्षेत्र 786.26 हेक्टेयर है। इसके अतिरिक्त जनपद पंचायत के अधीन 13 जलाशय हैं, जिनका जलक्षेत्र 622.50 हेक्टेयर है, जबकि जिला पंचायत के अधीन 7 जलाशय हैं, जिनका कुल जलक्षेत्र 1581.78 हेक्टेयर है। सिंचाई विभाग के जलाशयों से संबंधित इस वर्ष कोई आवंटन प्रस्तावित नहीं है। इस प्रकार जिले में कुल 244 तालाबों एवं जलाशयों का पट्टा आवंटन किया जाएगा।
मत्स्य विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं पात्रता के अनुसार पट्टा आवंटन की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने पात्र मत्स्य सहकारी समितियों, स्व-सहायता समूहों एवं इच्छुक मत्स्य पालकों से समय-सीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत करने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराना है। इससे मत्स्य पालन गतिविधियों को गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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