दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
रिपोर्टर आरिफ अंसारी
टांडा अंबेडकर नगर (उत्तर प्रदेश) में दर्ज एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले से संबंधित है, जिसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन (के वी एस ) के लाइब्रेरियन मोहम्मद अशहर को अदालत ने सशर्त जमानत दे दी है।
मुख्य बिंदु:
मामला और गिरफ्तारी: उमेर अहमद के खिलाफ कोतवाली टांडा पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस) की विभिन्न धाराओं (धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश) के तहत केस दर्ज किया गया था। उमेर अहमद 06 फरवरी 2026 से इस मामले में जेल में बंद है
बचाव पक्ष के मुख्य तर्क (जमानत का आधार):
ड्यूटी पर उपस्थिति (अलिबि ): घटना की तिथि पर मोहम्मद अशहर अपने कार्यस्थल (केंद्रीय विद्यालय संगठन ) में ड्यूटी पर तैनात थे। आधिकारिक उपस्थिति रिकॉर्ड के अनुसार, उनके लिए उत्तर प्रदेश टांडा अम्बेडकर नगर में मौजूद रहकर बैंक खाते से पैसे निकालना व्यावहारिक रूप से असंभव था।
साजिश का दावा: आरोप लगाया गया कि अशहर के एक रिश्तेदार (उमर अहमद) ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर साजिश रची और उनके खाते में अवैध रूप से पैसे ट्रांसफरकर निकाल लिए।
समानता का सिद्धांत (परिटी ): मामले के एक अन्य सह-आरोपी शरद मौर्य को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
साफ रिकॉर्ड: आरोपी का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
अदालत का फैसला: दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने ड्यूटी रिकॉर्ड, सह-आरोपी की जमानत और साफ रिकॉर्ड को मुख्य आधार मानते हुए मोहम्मद अशहर की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।
जमानत की शर्तें:
एक व्यक्तिगत मुचलका और दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करने होंगे।
आरोपी गवाहों या साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा।
अंबेडकर नगर: टांडा पी एन बी बैंक धोखाधड़ी मामले में घिरे केंद्रीय विद्यालय के लाइब्रेरियन को मिली जमानत, कोर्ट ने ड्यूटी रिकॉर्ड को माना मुख्य आधार टांडा /अंबेडकर नगर/भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस) के तहत दर्ज वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी केंद्रीय विद्यालय (के वी एस) के लाइब्रेरियन मोहम्मद अशहर को अदालत से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने पाया कि कथित घटना के वक्त आरोपी उत्तर प्रदेश टांडा अम्बेडकर नगर में मौजूद न होकर अपने कार्यस्थल पर ड्यूटी पर तैनात थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला अंबेडकर नगर जिले के कोतवाली टांडा पुलिस स्टेशन से संबंधित है। पुलिस ने आरोपी उमेर अहमद के खिलाफ केस क्राइम नंबर 0031/2026 35/26 36/26 41/26 50/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बी एन एस) की विभिन्न धाराओं—319(2) (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी), 318(4) (धोखाधड़ी), 316(5)( अपराधिक विश्वास घात ) 338 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 336(3) (जालसाजी), 340(2) (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मोहम्मद अशहर इस मामले में 16 अप्रैल 2026 से जेल में बंद थे।बचाव पक्ष की दलीलें: “साजिश के तहत फंसाया गया”सुनवाई के दौरान आवेदक (मोहम्मद अशहर ) के विद्वान अधिवक्ता अफरीन बानो ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पूरी तरह निर्दोष है और उसे इस मामले में दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाया गया है।बचाव पक्ष ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु अदालत के समक्ष रखे:कार्यस्थल पर उपस्थिति: मोहम्मद अशहर केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और केंद्रीय विद्यालय संगठन (के वी एस ) में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान के आधिकारिक उपस्थिति रिकॉर्ड (अटेंडडेन्स रिकॉर्ड ) के अनुसार, कथित घटना की तिथि पर वे अपने कार्यस्थल पर उपस्थित थे। ऐसे में उनके द्वारा टांडा मे स्थित बैंक खाते से खुद राशि निकालना व्यावहारिक रूप से असंभव था।अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि आवेदक के रिश्तेदार उमेर अहमद ने बैंक कर्मियों और अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की। उन्होंने साजिश के तहत मोहम्मद अशहर के खाते में पैसे ट्रांसफर किए और बाद में उन्हें निकाल लिया।जांच पूरी होने की दलील: चूंकि मामले में पुलिस द्वारा आरोप पत्र ( चार्ज सीट ) पहले ही दाखिल किया जा चुका है, इसलिए आरोपी द्वारा सबूतों से छेड़छाड़ या न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने की कोई संभावना नहीं है। इसके अलावा, अब किसी भी प्रकार की पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है।समानता का सिद्धांत ( परिटी): मामले के एक अन्य सह-आरोपी शरद मौर्य (जिस पर फर्जी बीमा पॉलिसी/बॉन्ड बनाने का आरोप था) कोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा पहले ही 13 मई 2026 को जमानत दी जा चुकी है।साफ रिकॉर्ड: आवेदक का कोई पुराना आपराधिक इतिहास नहीं है और वह एक कानून का पालन करने वाला नागरिक है।अभियोजन पक्ष का विरोधदूसरी ओर, राज्य सरकार के विद्वान अपर शासकीय अधिवक्ता (ए जी ए ) ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के बेहद गंभीर आरोप हैं, इसलिए वह जमानत पर रिहा होने का हकदार नहीं है।अदालत का फैसला और महत्वपूर्ण टिप्पणियाँदोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का गहनता से अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने मोहम्मद अशहर को जमानत दे दी।अदालत ने अपने आदेश में मुख्य रूप से इन बातों को रेखांकित किया:जमानत आवेदन के साथ संलग्न उपस्थिति रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि संबंधित तिथि को आरोपी केंद्रीय विद्यालय में अपनी ड्यूटी पर तैनात था आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।इन शर्तों के साथ मिली जमानतअदालत ने मोहम्मद अशहर को संबंधित ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार एक व्यक्तिगत मुचलका और उतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने जमानत के लिए निम्नलिखित कड़ी शर्तें भी लागू की हैं:आरोपी गवाहों साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेगा।मुकदमे के दौरान जमानत की स्वतंत्रता का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा।अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानतदारों के सत्यापन की जिम्मेदारी निचली अदालत की होगी कोर्ट ने यह भी साफ किया कि
कोर्ट की हर सुनवाई पर आरोपी या उसके वकील को उपस्थित होना अनिवार्य होगा। शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकती है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949







