खुले में मिले करोड़ो के सरकारी दस्तावेज, मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला, कार्रवाई की मांग आदिवासी विकास परिषद ने 15 सवालों से प्रशासन को घेरा

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हरीश सोनी जिला संपादक केसरिया हिंदुस्तान

आलीराजपुर। जनजातीय कार्य विभाग के करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों, टेंडरों, तकनीकी स्वीकृतियों और भुगतान से जुड़े शासकीय अभिलेख खुले में मिलने का मामला सामने आने के बाद अब तूल पकड़ने लगा है। मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, एसआईटी गठन और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत पत्र के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि विभाग के महत्वपूर्ण अभिलेख रिकॉर्ड रूम के बजाय खुले खंडहर में पड़े मिले। इससे सरकारी रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किए जाने की आशंका पैदा होती है। परिषद का यह भी आरोप है कि मामला मीडिया में आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों को जल्दबाजी में समेटने का प्रयास किया।
*छह प्रमुख मांगें*
परिषद ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की एसआईटी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच, सभी अभिलेखों का फिजिकल वेरिफिकेशन, जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ पर रोक, सहायक आयुक्त सहित जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, रिकॉर्ड नष्ट या गायब मिलने पर एफआईआर दर्ज करने तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
*15 सवालों में मांगा जवाब*
महेश पटेल ने पूछा है कि करोड़ों रुपये से जुड़े दस्तावेज खुले में कैसे पहुंचे, इसके लिए जिम्मेदार कौन है, रिकॉर्ड रूम होने के बावजूद अभिलेख बाहर क्यों पड़े मिले और क्या इस मामले में केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या वरिष्ठ अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि खुले में मिले दस्तावेजों में वित्तीय स्वीकृतियों, टेंडरों और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे या नहीं, पिछले पांच वर्षों में कितने रिकॉर्ड नष्ट किए गए, उनका वैधानिक रिकॉर्ड क्या है तथा पूरे प्रदेश में रिकॉर्ड प्रबंधन का विशेष ऑडिट कराया जाएगा या नहीं।
*वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी प्रतिलिपि*
परिषद ने शिकायत की प्रतिलिपि जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, संभागायुक्त इंदौर, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक आलीराजपुर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है।
महेश पटेल ने कहा कि सरकारी अभिलेख जनता की धरोहर हैं। इनके संरक्षण में लापरवाही प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता के विश्वास पर सीधा आघात है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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