दिनेश शुक्ला
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
आलोट विकास के वादा करने वाले जिम्मेदार जनप्रतिनिधि चुनावों के समय में सैकड़ों वादे करते हे लेकिन चुनाव के बाद गांव की तफर देखते भी नहीं हे। जिसके चलते ग्रामीण अंचलों में लोगों को परेशान होना पड़ता हे लेकिन जिम्मेदारों इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई परेशान हे। ऐसा ही एक मामला नगर से मात्र 5 किलो मीटर दूर ग्राम बेटी खेड़ी में देखने को मिला हे जहां ना तो आने जाने का रास्ता सही हे ओर ना ही रास्ते के बीच बहने वाली नदी पर पुल जिसकी वजह से बारिश के दिनों में लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर आना जाना करना पड़ता हे हद तो तब हे जब बारिश के दिनों में नदी में पानी आ जाता हे ओर स्कूल जाने वाले नहीं मुन्ने बच्चे स्कूल जाने के लिए बहते पानी से गुजर कर शेरपुर जाना पड़ता हे बहते पानी में नन्हे मुन्ने बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर अपने भविष्य को बनाने के लिए स्कूलों में जाते हैं। जहानाबाद पंचायत के गांव माल्या से बेटीखेड़ी शेरपुर तक की मुख्य सड़क आज तक नहीं बन पाई जिसके कारण हजारों लोगों को घुल कीचड़ ओर दलदल जैसे रास्तों से गुजरना पड़ता हे जहानाबाद पंचायत के माल्या से बेटी खेड़ी और शेरपुर का संपर्क मार्ग अभी भी कच्चा ओर जर्जर हे शेरपुर से बेटी खेड़ी मात्र 1 किलोमीटर का रास्ता है। लेकिन बीच में लूनी नदी बहती है और उसे पर पुल नहीं है जिसके कारण यहां के रहो वीडियो को 12 किलोमीटर लंबा मार्ग तय करना पड़ता है। बेटी खेड़ी से झंगरिया मात्र 2 किलोमीटर है लेकिन लेकिन यह रास्ता भी उपेक्षित पड़ा हुआ है बारिश के दिनों में यह क्षेत्र पूरी तरीके से जल जमाव एवं कीचड़ से पट जाता है और आवागमन करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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