दैनिक केसरिया हिंदुस्तान से जिला ब्यूरो महेश वर्मा
टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ वन मंडल में अधिकारियों की कथित लापरवाही, टेंडर प्रक्रियाओं में गड़बड़ी और प्रशासनिक अहंकार के चलते इस मानसून सीजन में होने वाला वृक्षारोपण बड़े भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने की कगार पर पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत वृक्षारोपण क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए खरीदी जाने वाली कटीली तार जाली (फैंसिंग) और फैंसिंग पोल्स के टेंडर में हुई भारी अनियमितताओं के कारण अब तक सुरक्षा घेरे का निर्माण नहीं हो सका है। सुरक्षा और घेराव के अभाव में जिले के बल्देवगढ़, जतारा और टीकमगढ़ रेंज के अंतर्गत लगभग 250 से 300 हेक्टेयर वन भूमि पर रोपे जाने वाले 2 से 3 लाख नए पौधों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
विवादों का केंद्र बना टीकमगढ़ वन मंडल
जब से वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) के रूप में राजाराम परमार और उप वन मंडल अधिकारी (एसडीओ) के रूप में मनीषा बघाड़े की पदस्थापना हुई है, तब से टीकमगढ़ वन मंडल लगातार विवादों और नकारात्मक सुर्खियों में बना हुआ है। फर्जी एनओसी कांड, रेस्ट हाउस विवाद, बाबुओं का निलंबन, और फर्जी भुगतान जैसे मामलों के बाद अब कारी खदान और बेदोरा खदान के मामले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वन मंडल में फर्जी नियुक्तियां, नियम विरुद्ध स्थानांतरण, वन भूमि पर अवैध कब्जे, अवैध उत्खनन, वनोपज के अवैध परिवहन और लोकायुक्त ट्रैप जैसी अनगिनत शिकायतें लंबित हैं। इन प्रशासनिक उलझनों के कारण वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा और वानिकी कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में असफल साबित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर जमीनी स्तर के स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की राय: बिना फैंसिंग पौधारोपण यानी मवेशियों को खुला आमंत्रण
सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वानिकी जानकारों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में यदि फैंसिंग पोल्स और तार जाली की आपूर्ति हो भी जाती है, तो उन्हें लगाने में कम से कम 15 से 20 दिन का समय लगेगा। यदि बिना घेराव (फैंसिंग) के आनन-फानन में पौधारोपण किया जाता है, तो यह नए पौधों को सीधे आवारा मवेशियों के हवाले करने जैसा होगा। सुरक्षा घेरे के बिना पौधारोपण करना टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई और शासन के करोड़ों रुपए के बजट को सीधे तौर पर बर्बाद करना है।
ऊपरी दबाव में निचला स्टाफ, अटका महाअभियान
जहां एक ओर पूरे मध्य प्रदेश में वन विभाग मानसून के आगमन के साथ ही पूरी तन्मयता से पौधारोपण कार्य में जुटा हुआ है, वहीं टीकमगढ़ में अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। आरोप है कि सीसीएफ छतरपुर नरेश सिंह यादव और डीएफओ टीकमगढ़ राजाराम परमार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए बिना फैंसिंग और पोल्स के ही पौधारोपण कार्य पूर्ण करने का दबाव अधीनस्थ रेंजरों और जमीनी अमले पर बना रहे हैं। हालांकि, अपनी साख और जवाबदेही के डर से निचला वन अमला बिना सुरक्षा इंतजामों के रोपण करने को तैयार नहीं दिख रहा है।
’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान पर भी संशय
सुरक्षा व्यवस्था और टेंडर घोटाले के चलते उपजे इस गतिरोध का असर स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। पौधारोपण कार्य शुरू न होने से स्थानीय सीजनल नेता और पर्यावरण प्रेमी भी मायूस हैं। केंद्र और राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने का सपना संजोए बैठे लोगों को अब इस योजना के पूरी तरह फ्लॉप होने का डर सताने लगा है।
यदि समय रहते उच्च स्तर पर हस्तक्षेप कर इस टेंडर घोटाले की जांच नहीं की गई और पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई, तो टीकमगढ़ जिले का पर्यावरण और जंगल पूरी तरह उजाड़ की ओर बढ़ जाएंगे।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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