गौमाता की रक्षा के लिए अपने प्राण भी अर्पित कर देंगे — पं. मोहितरामजी पाठक

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नितिन जौहरी दैनिक केसरिया हिंदुस्तान

आदि अनादि काल से भारतीय संस्कृति में गौमाता को मां का दर्जा दिया गया है। हमारे वेद, पुराण और शास्त्रों में गौमाता को ईश्वर के समान पूजनीय बताया गया है। इसी सनातन परंपरा को जीवित रखते हुए श्रीराम गौशाला गोतीर्थ चिकित्सालय परिसर, सीहोर में प्रतिदिन बीमार, पीड़ित और दुर्घटनाग्रस्त गौमाताओं का उपचार एवं जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं।यह पुण्य कार्य कथा व्यास, परम गौभक्त एवं क्रांतिकारी राष्ट्रीय संत पंडित मोहितरामजी पाठक के सानिध्य में निरंतर चल रहा है। उनके मार्गदर्शन में समर्पित डॉक्टरों की टीम दिन-रात गौसेवा में लगी हुई है। इस टीम में डॉ. मनोहर घावरी, सौरभ राठौर, रोहन यादव, जितेंद्र नारोलिया, शुभम मालवीय, जितेंद्र परमार, वीरेंद्र मालवीय, मनीष नामदेव, राजकुमार मालवीय, विजय नामदेव सहित अनेक गौसेवक तन-मन-धन से सेवा में जुटे हुए हैं।पंडित मोहितरामजी पाठक ने कहा कि “गौमाता की रक्षा के लिए यदि हमें अपने प्राण भी देने पड़ें, तो हम पीछे नहीं हटेंगे।” उनका यह संकल्प केवल शब्द नहीं, बल्कि हर दिन की सेवा में साकार होता दिखाई देता है।
लेकिन एक ओर जहां गौशालाओं में सेवा और समर्पण की गंगा बह रही है, वहीं दूसरी ओर समाज में गौमाता के साथ हो रही अमानवीय घटनाएं अत्यंत पीड़ादायक हैं।
समाज के हर वर्ग को यह समझना होगा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। यदि हम सच में सनातन संस्कृति को बचाना चाहते हैं, तो गौसेवा को अपना कर्तव्य बनाना होगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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