दैनिक केसरिया हिंदुस्तान फैसल कुरैशी
मथुरा। भारतीय किसान यूनियन चढूनी संगठन द्वारा किसान विरोधी नीतियों और प्रस्तावित भारत अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के आव्हान पर योद्धा चौराहे से पैदल मार्च कर कलेक्ट्रेट तक नारेवाजी कर प्रदर्शन किया। कलेक्टर पहुंच कर प्रधानमंत्री को प्रेषित ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा।
जिला अध्यक्ष संजय पाराशर ने कहा डील देश की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, छोटे व्यापार, रोजगार तथा आत्मनिर्भरता के लिए गंभीर खतरा साबित होगी।
भारत के अधिकांश किसान छोटे एवं सीमांत किसान हैं, जबकि अमेरिका में कृषि बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से की जाती है ।वहां के किसानों को भारी सरकारी सहायता एवं सब्सिडी प्राप्त होती है। ऐसी असमान परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की फ्री ट्रेड डील भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे। देश की कृषि, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का निर्णय जनता और संबंधित पक्षों की व्यापक सहमति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए। मांग की गई भारत-अमेरिका प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील (एफटीए) को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा देश के किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के हितों की रक्षा की जाए। प्रदेश महासचिव सतीश, जिला उपाध्यक्ष सोनवीर सिंह ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताएँ अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं और समझौते को अंतिम रूप देने की चर्चाएँ सामने आ रही हैं। किसानों को आशंका है कि इस समझौते के तहत भारत अपने कृषि बाज़ार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अधिक खोल रहा है, जिससे करोड़ों भारतीय किसानों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा। जब भारतीय कृषि में कंपनियां इंटर करेगी और उसके बाद जब कृषि क्षेत्र किसानों के हाथ से निकल जाएगा तो यही लोग खाद्य सामग्री को ब्लैक करेंगे जिससे खाद्य सामग्री के रेट आसमान छुएंगे और भारत के किसानों की आजीविका का साधन खत्म होने से बेरोजगारी बढ़ेगी और किसान और बेरोजगारों को आर्थिक तंगी आने की वजह से उनकी आत्महत्याएं बढ़ेंगी। कपास, लाल ज्वार, सोयाबीन तेल, संतरे के रस सहित अन्य कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) हटाया जाता है, तो भारतीय किसान भारी सरकारी सब्सिडी प्राप्त अमेरिकी उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। इससे देश के कृषि क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान होगा और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उसे समझौते में अलग-अलग वस्तुओं के साथ कृषि उत्पादन लिखा गया है जिससे भविष्य में कृषि उत्पादन में और भी वस्तुएं शामिल की जा सकती हैं। चिंता व्यक्त व्यक्त करते हुए कहा कि इस समझौते के माध्यम से अमेरिकी डेयरी एवं पोल्ट्री उत्पादों के आयात का रास्ता आसान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) कृषि उत्पादों को भी अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय बाज़ार में प्रवेश दिलाने की कोशिश की जा रही है। जिसका भारतीय किसान घोर विरोध करते हैं।जो देश की कृषि व्यवस्था और उपभोक्ताओं (खाने वालों)के हितों के लिए चिंताजनक है।एमएसपी व्यवस्था बंद करवाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है यदि अमेरिका के दबाव में एसपी पर खरीद बंद होती है तो गेहूं, धान, खाद्य तेल उत्पादक किसान बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत का किसान केवल अन्नदाता नहीं है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय संप्रभुता का प्रहरी है। भारत की खेती किसानों की आजीविका है। किसी भी विदेशी दबाव में आकर ऐसी नीतियाँ स्वीकार नहीं की जानी चाहिएँ जो देश की कृषि व्यवस्था को कमजोर करें और किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर करें। केंद्र सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़े सभी प्रस्तावों को सार्वजनिक किया जाए तथा किसानों, मजदूरों, डेयरी उत्पादकों और कृषि विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श किए बिना कोई भी निर्णय न लिया जाए।
प्रदर्शन में गौरव तोमर, भुल्ली उर्फ मान सिंह, महिला प्रकाश अध्यक्ष गोमती, नवल सिंह, तुलसी दास, पुष्पेन्द्र सिंह, लक्ष्मी नारायण जी, गिरवर सिंह जी , निहाल सिंह जी, भगत सिंह, बच्चू सिंह,योगेंद्र सिंह ,मोहन सिंह, झूल्ला, गोरधना, लोचन सिंह, पंकज सिंह ,बीटो सिंह ,हीरा सिंह, गंगा प्रसाद, राजवीर सिंह, ,भीमसेन चतुर सिंह, छोटू सिंह ,रज्जो सिंह, राजाराम, मनोज कैलाश, अजयपाल तोमर , गुड्डू ताँगर आदि सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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Author: Dainik kesariya Hindustan
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