एक खसरा दो तालाब और 34 लाख का खेल गोकलपुर में विकास के नाम पर सरकारी खजाने पर डाका होने के आरोप से मचा भूचाल

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो सिवनी

जिस जमीन पर पहले से बना था परकोलेशन टैंक उसी पर फिर 24 लाख का तालाब आखिर सिस्टम को किसने दिखाया हरा सिग्नल
सिवनी केवलारी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बनाथर के ग्राम गोकलपुर में सामने आया एक मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है ग्रामीणों के आरोपों ने पंचायत और तकनीकी अमले की कार्यप्रणाली पर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैंजिनका जवाब मिलना आसान नहीं दिख रहा। मामला खसरा नंबर 120 का है जहां पहले मनरेगा योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की लागत से परकोलेशन टैंक बनाया गया था और अब उसी भूमि पर करीब 24 लाख रुपये की लागत से नया तालाब निर्माण शुरू होने के आरोप लगे हैं ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहआरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी धन के उपयोग और स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न है सवाल यह उठ रहा है कि जिस भूमि पर पहले से जल संरचना मौजूद थी उसी स्थान पर दूसरी जल संरचना की स्वीकृति आखिर किस आधार पर दी गई कागजों में नया तालाब जमीन पर पुराना ढांचा ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण स्थल पर पहले से मौजूद परकोलेशन टैंक कोनजरअंदाज कर नया तालाब स्वीकृत किया गया यदि तकनीकी मानकों और भू-अभिलेखों की जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो स्वीकृति प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक कई स्तरों पर जवाबदेही तय हो सकती है 34 लाख की परियोजनाओं पर उठे सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही स्थान पर दो योजनाओं के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं इससे यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं विकास कार्यों की आड़ में कागजी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग तो नहीं हुआ ग्रामीणों ने मांग की है कि खसरा रिकॉर्ड तकनीकी स्वीकृति, जियो टैगिंग और भुगतान संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं जल संरक्षण या जलभराव का संकट किसान बुधराम वरकड़े सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित तालाब ऐसी जगह बनाया जा रहा है जहां पानी की पर्याप्त आवक नहीं है उनका आरोप है कि इससे जल संरक्षण के बजाय आसपास के खेतों में जलभराव और फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ सकती है साथ ही क्षेत्र के पेड़-पौधों और प्राकृतिक संरचना को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है सरपंच से लेकर तकनीकी अमले तक चर्चा में मामले में ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों और तकनीकी अधिकारियों की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं ग्रामीणों का आरोप है कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं अन्यथा यह मामला बड़े वित्तीय अनियमितता की जांच का विषय बन सकता है ग्रामीणों की चेतावनी ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई और निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे तथा मामले की शिकायत लोकायुक्त आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और अन्य जांच एजेंसियों से करेंगे अब सबसे बड़ा सवाल क्या खसरा नंबर 120 पर वास्तव में पहले से परकोलेशन टैंक मौजूद है यदि हां तो उसी भूमि पर 24 लाख रुपये के नए तालाब की स्वीकृति कैसे मिली इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में न केवल गोकलपुर बल्कि पूरे जिले में पंचायत योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा असर डाल सकता है

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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