मो तफसीर
संवाददाता बल्दीराय
न्याय मिलने में भले ही नौ साल लग गए, लेकिन आखिरकार नन्दौली गांव की उचित दर दुकान का विवाद समाप्त हो गया। वर्षों तक अदालत में चली कानूनी लड़ाई के बाद उच्च न्यायालय के आदेश से राशन की दुकान बहाल कर दी गई है। खास बात यह रही कि जिस असगरी बेगम ने अपने अधिकार के लिए लड़ाई शुरू की थी, फैसला आने से पहले ही उनका निधन हो गया।
जानकारी के अनुसार, नन्दौली गांव की उचित दर विक्रेता असगरी बेगम की दुकान को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद मामला न्यायालय पहुंच गया। करीब नौ वर्षों तक मुकदमा लंबित रहा। इस दौरान असगरी बेगम का निधन हो गया, जिससे परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद धूमिल होती नजर आने लगी थी।
हालांकि, शासनादेश-2019 के तहत मृतक आश्रित प्रावधान ने परिवार को राहत दी। असगरी बेगम के पुत्र जीशान पुत्र अरमान को उचित दर विक्रेता के रूप में चयनित कर नियुक्ति प्रदान की गई है। उपजिलाधिकारी ने बताया कि यह नियुक्ति शासनादेश के अनुरूप की गई है तथा भविष्य में किसी सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अधीन रहेगी।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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