केसरिया हिंदुस्तान नर्मदापुरम पिपरिया संवाददाता नरेन्द्र बाल्मीक 9179289602
*पिपरिया।* “जिस दिन हमने बुरा सोचना बंद कर दिया, उसी दिन भगवान के सामने हमारी भक्ति सिद्ध हो जाएगी। भोलेनाथ स्वयं प्रकट हो जाएंगे।” यह दिव्य संदेश प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य प्रदीप कृष्ण शास्त्री ने इंदिरा गांधी वार्ड में चौहान परिवार द्वारा आयोजित शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन दिया।
कथा में उन्होंने कहा कि भगवान से मांगना है तो उनके दर्शन मांगो, शांति मांगो। भक्ति करनी है तो मीरा जैसी करो। महाकवि सूरदास की श्रद्धा-भक्ति का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने समझाया कि तन का स्नान साबुन-शैंपू से हो जाता है, लेकिन मन और आत्मा का स्नान भजन और सत्संग से ही होता है।
कुबेर का अहंकार और गणेश जी की लीला
आचार्य प्रदीप कृष्ण शास्त्री ने कुबेर जी का अहंकार तोड़ने का मार्मिक प्रसंग सुनाया। बताया कि एक बार शंकर जी ने कुबेर के निमंत्रण पर पुत्र गणेश जी को भेजा। गणेश जी ने कुबेर के घर का पका-कच्चा सब भोजन खा लिया, फिर भी तृप्त नहीं हुए। कुबेर ने शंकर जी को स्मरण किया तो उपाय मिला — गणेश जी के सामने दूर्वा रखो। दूर्वा रखते ही गणेश जी तृप्त हो गए और कुबेर का अहंकार चूर-चूर हो गया।
भक्त यज्ञदत्त और नेत्रहीन वृद्धा का प्रसंग
कथा के दौरान उन्होंने भक्त यज्ञदत्त और एक नेत्रहीन वृद्ध महिला के प्रेरक प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। साथ ही भगवान शंकर और देवी पार्वती के दिव्य विवाह का वर्णन किया। बताया कि पार्वती जी ने जंगल में घोर तपस्या कर भोलेनाथ को प्रसन्न किया और उन्हें पति रूप में प्राप्त करने का वरदान पाया।
विवाह की मनोरम झांकियों पर झूमे बाराती
कथा स्थल पर शंकर-पार्वती विवाह की मनोरम झांकियां सजाई गईं। बाराती बने श्रद्धालु भजन-संगीत की धुन पर जमकर नाचे। पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से भक्तिमय हो उठा।
आचार्य ने पितृ पक्ष का महत्व बताते हुए कहा कि पितृ पक्ष कर्ण महाराज द्वारा निर्मित किए गए हैं। पुरुषोत्तम मास में आयोजित इस शिवपुराण कथा में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। चौहान परिवार के इस आयोजन से पूरे नगर में धर्म और भक्ति की लहर दौड़ गई है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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