(मध्य प्रदेश क्राइम ब्यूरो पारस बारोड)
देपालपुर के नजदीक ग्राम नांद्रा में चल रही भागवत महापुराण में प्रसिद्ध कथावाचक डूंगर माटी के पंडित श्री उमेश सिंह जी शर्मा के मुखारविंद से भागवत कथा में कहां गया कि आज के इस युग में किसी को ज्ञान की जरूरत नहीं है और नाही धन दौलत की जरूरत है और ना ही सहयोग की अगर जरूरत है तो वहां है प्रेम किसी का प्रेम समाज के प्रति है किसी का प्रेम धर्म के प्रति है और किसी का प्रेम देश के प्रति है इसे ही जिससे सैनिक का प्रेम देश के प्रति होता है और संतों का प्रेम धर्म के प्रति होता है इस प्रकार मनुष्य का प्रेम मनुष्य के प्रति होना चाहिए खोज तो खुद की है जो कमाया यही छोड़ना पड़ेगा जो सीखा है यही भुलना पड़ेगा परमात्मा तो बहाना है मिलन खुद से पड़ेगा गुरु और गोविंद यह दोनों बदलने की वस्तु नहीं है नोट के खातिर मनुष्य धर्म बदल लेते जात बदल लेते और तो और बाप भी बदल देते साथ ही उद्धव और गोपियों का संवाद बताया गया उद्धव को अपने ज्ञान का अहंकार था जिसमें उद्धव गोपियों से पूछते हैं कि तुम्हारा प्रेम मार्ग में कितना आगे गोपिया कहती है कि मेरी नाक में नथनी डाल दो बेल के जैसे चाहे मेरी खाल खिंचवा दो या फिर काले नाग से डसवां दो पर श्री कृष्ण से प्रेम छोड़ने को मत कहो गोपियों की बात सुनकर उद्धव को अपने ज्ञान का अहंकार खत्म और प्रेम की भक्ति में लीन हो गए भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रोता दूर-दूर से पहुंचे और भंडारा महाप्रसाद का लाभ लिया
Author: Dainik kesariya Hindustan
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