दैनिक केसरिया हिंदुस्तान से मुस्तफा अली
सुसनेर
आज विश्व भर में बढ़ते जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्रदूषण के कारण जैव विविधता गंभीर संकट का सामना कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अनेक वन्य जीव एवं दुर्लभ वनस्पतियाँ विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुकी हैं।
भारत में भी जंगलों के घटते क्षेत्र, नदियों के प्रदूषण और अनियंत्रित शहरीकरण का सीधा प्रभाव पशु-पक्षियों एवं प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को प्राकृतिक संतुलन की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सरकार द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों तथा वृक्षारोपण अभियानों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यालयों एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
वही जिला कलेक्टर प्रीति यादव एवं जिला शिक्षा अधिकारी सौरभ जैन के निर्देशन में स्काउट मास्टर भेरूलाल ओसारा जलवायु परिवर्तन नेता ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक पेड़ लगाएँ, जल स्रोतों को स्वच्छ रखें तथा वन्य जीवों की सुरक्षा में सहयोग करें। जैव विविधता केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं, बल्कि मानव जीवन के अस्तित्व का आधार भी है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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