राजेन्द्र तिवारी दमोह
दमोह एसपी कलादगी ने किया मामले का खुलासा
सरकार से मान्यता प्राप्त संजीवनी क्लीनिक में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले तीन फर्जी डॉक्टरों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया, इनमें दो डॉक्टर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत शहर के सुभाष कॉलोनी में संचालित संजीवनी क्लीनिक में नियुक्त थे, जबकि एक डॉक्टर जबलपुर में पदस्थ था,जांच के दौरान इन डॉक्टरों की एमबीबीएस की डिग्री व मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन भी फर्जी पाया गया, रविवार की शाम एसपी आनंद कलादगी ने मामले का खुलासा किया,
एसपी ने बताया कि शनिवार को उन्हें दमोह सीएमएचओ से जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था कि संजीवनी क्लीनिक में नियुक्त डॉ. कुमार सचिन यादव पिता छत्रपाल सिंह यादव निवासी मेहरा मंदिर, शकुंनतला परी के पीछे ग्वालियर व डॉ. राजपाल गौर पिता रमेश गौर निवासी काकूखेड़ा पोस्ट मगरधरा जिला सीहोर द्वारा फर्जी डिग्री एवं फर्जी रजिस्ट्रेशन के आधार पर शासकीय संस्था को धोखा देकर न केवल अवैध लाभ प्राप्त किया है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य व जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, दोनों डॉक्टर करीब एक वर्ष से नियुक्त थे, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कोतवाली थाना में धारा ३१८ (३) ३३८, ३३६ (३), ३४० (२) बीएनएस के तहत मामला पंजीबृद्ध किया, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया, दोनों आरोपियों से कोतवाली पुलिस द्वारा पूछताछ की गई तो दोनों ने फर्जी डिग्री व रजिस्ट्रेशन के आधार पर नौकरी प्राप्त करने की बात स्वीकार की, पूछताछ के दौरान एक और फर्जी डॉक्टर का पता चला जो जबलपुर में पिछले ढाई साल से नियुक्त है, जिसके बाद दमोह से एक पुलिस टीम को जबलपुर भेजा गया, जहां से डॉ. अजय मौर्य पिता मनीराम मौर्य निवासी धमकन रोड अलापुरा जोरा मुरैना, हाल चैरीताल जबलपुर को गिरफ्तार कर दमोह लाया गया, इस कार्रवाई में एएसपी सुजीत सिंह भदोरिया, सीएसपी एचआर पांडे, कोतवाली टीआई मनीष कुमार सहित पुलिस टीम का सहयोग रहा,
और भी फर्जी डॉक्टरों का हो सकता है खुलासा
एसपी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि फर्जी एमबीबीएस डिग्री व रजिस्ट्रेशन बनाने में सहयोग करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके लिए टीमें तलाश में जुटी हैं, जल्द ही ऐसे अन्य आरोपी भी पकड़े जाएंगे, एसपी ने कहा फर्जी डिग्री के आधार पर राज्य स्तर की संस्था के माध्यम से नियुक्तियां प्राप्त करना गंभीर व संवेदनशील विषय है, यह मामला आमजन के स्वास्थ्य और इलाज से साथ जुड़ा है, इसमें भोपाल स्तर की संस्थाओं की भूमिका भी संदिग्ध है,
बड़ा सवाल:
एक साल से मरीजों की कर रहे थे जांच दोनों डॉक्टर पिछले एक साल से संजीवनी क्लीनिक में मरीजों का इलाज का रहे हैं, इसके बावजूद भी इनके दस्तावेजों की जांच नहीं हुई, लेकिन जब इस मामले की शिकायत हुई तो सीएमएचओ द्वारा इनकी जांच कराई गई, जिसमें दोनों के दस्तावेज फर्जी पाए गए, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा इनकी नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं, क्योंकि यदि शुरूआती समय से ही इनकी जांच की जाती तो दोनों डॉक्टर पहले ही पकड़े जाते, एसपी श्री कलादगी ने बताया कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है कि कि फर्जी दस्तावेज बनाने में कौन-कौन शामिल है,
बीते साल पकड़ा था फर्जी डॉक्टर जिसके इलाज से सात लोगों की मौत हुई थी,
दमोह के मिशन अस्पताल में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया था, जिसने विदेशी डॉक्टर का नाम इस्तेमाल कर फर्जी कागजात तैयार किए गए थे, उसने दमोह में 7 मरीजों के हार्ट के ऑपरेशन किए थे, जिसमें सभी की मौत हो गई थी, फर्जी डॉक्टर जोन उर्फ नरेंद्र यादव को गिरफ्तार किया गया था, जो दमोह जेल में बंद है और वहीं मिशन अस्पताल में ताला लग गया था,
फिलहाल जांच जारी है,,,,,
Author: Dainik kesariya Hindustan
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