सक्ति जिला पंचायत CEO के आदेश को अनदेखी, ट्रांसफर के बाद भी मलाईदार कुर्सियों से चिपके तकनीकी सहायक; जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान
जिला सक्ति में इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था और कर्मचारियों की मनमानी चरम पर है। स्थिति यह है कि मातहत कर्मचारी अब अपने उच्च अधिकारियों के लिखित आदेशों को भी अनदेखी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना से जुड़ा है, जहाँ जिला पंचायत सीईओ के ट्रांसफर आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। आदेश जारी हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन तकनीकी सहायक अपनी मलाईदार कुर्सियों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।विगत **01 अप्रैल 2026** को जिला पंचायत सीईओ सक्ति द्वारा मनरेगा के तहत कार्यरत तकनीकी सहायकों का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था। इस प्रशासनिक फेरबदल में सुनील कुमार यादव का तबादला मालखरौदा से डभरा किया गया था (जिन्होंने तत्परता दिखाते हुए डभरा में ज्वाइनिंग ले ली है)।
राकेश चंद्रा का तबादला जैजैपुर से डभरा किया गया था।दुर्गा प्रसाद चंद्रा का तबादला डभरा से जैजैपुर किया गया था।इस आदेश के परिपालन में जनपद पंचायत जैजैपुर के सीईओ द्वारा तकनीकी सहायक राकेश चंद्रा को दिनांक 10.04.2026 को विधिवत कार्यमुक्त (रिलीव) भी किया जा चुका है।नियमानुसार रिलीव होने के तुरंत बाद उन्हें डभरा जनपद में अपनी उपस्थिति देनी थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि रिलीव होने के लंबा समय बीत जाने के बाद भी राकेश चंद्रा ने डभरा में ज्वाइन नहीं किया है।यही हाल दुर्गा प्रसाद चंद्रा का भी है। जिला सीईओ के आदेश और नियमों को ताक पर रखकर दोनों ही तकनीकी सहायकों द्वारा उच्च अधिकारियों के आदेश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
कर्मचारियों की इस खुली मनमानी को लेकर अब क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो में रोष व्याप्त है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि
“जब शासकीय सेवा में तैनात कर्मचारी ही उच्च अधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, तो क्षेत्र में विकास कार्य कैसे सुचारू रूप से चलेंगे? यह सीधे तौर पर घोर अनुशासनहीनता और प्रशासनिक तंत्र को चुनौती है।”सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इन तकनीकी सहायकों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसके दम पर ये जिला पंचायत सीईओ के आदेश को भी महज़ कागजी टुकड़ा समझ रहे हैं?एक तरफ जहाँ सुनील कुमार यादव ने आदेश का पालन करते हुए अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली है, वहीं दुर्गा चंद्रा और राकेश चंद्रा का उच्च आधिकारी के आदेश का अनदेखी समझ से परे है। अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत सीईओ इस खुली अवहेलना और अनुशासनहीनता पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों तकनीकी सहायकों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर राजनीतिक संरक्षण के आगे आदेश केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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