स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल, इलाज न मिलने के आरोप से मचा हड़कंप
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान संवाददाता वीरू गौतम
पीलीभीत पूरनपुर। सरकार भले ही ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों की पोल खोल देती है। ऐसा ही एक मामला पूरनपुर क्षेत्र से सामने आया है, जहां प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला को कथित तौर पर समय पर उपचार नहीं मिला। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में घंटों भटकने के बाद परिजनों को मजबूरी में निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि ग्राम गोरा निवासी एक व्यक्ति रविवार देर रात अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पूरनपुर लेकर पहुंचा था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी महिला को तत्काल भर्ती नहीं किया गया और ना ही प्राथमिक उपचार देने में गंभीरता दिखाई गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने उन्हें एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक भटकाया और जिम्मेदारी लेने से बचता रहा। महिला दर्द से तड़पती रही लेकिन कोई भी कर्मचारी उसकी हालत को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आया।
परिजनों के मुताबिक जब उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाई तो उन्हें महिला अस्पताल ब्लॉक भेज दिया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर दोबारा सीएचसी जाने की बात कह दी गई। इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। दर्द और घबराहट के बीच परिवार पूरी रात अस्पताल परिसर में परेशान होता रहा। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के चलते आखिरकार परिजनों ने हिम्मत हारकर निजी अस्पताल का रुख किया, जहां महिला को भर्ती कर इलाज शुरू कराया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते सरकारी अस्पताल में उपचार मिल जाता तो उन्हें निजी अस्पताल में भारी खर्च उठाने की नौबत नहीं आती। घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है और लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवार सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी यदि समय पर उपचार न मिले तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. मनीष राज ने मामले की जांच कराने की बात कही है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने भी शिकायत को गंभीर बताते हुए जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला कागजों तक ही सीमित रह जाता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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