दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान रविन्द्र वर्मा
लखनऊ। बिजली कनेक्शन और लाइन निर्माण शुल्क को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का एक महत्वपूर्ण आदेश सामने आया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं में नई उम्मीद जगी है।
मामला सुदामा देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से जुड़ा है। इस याचिका की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ एवं माननीय न्यायमूर्ति अभिषेक कुमार चौधरी की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कृष्णा राम यादव एवं अधिवक्ता श्रीमती मोनू ने प्रभावी पैरवी की।
सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ता के आवास तक एलटी लाइन पहुंचाने की दूरी लगभग 340 मीटर है। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि यदि लाइन नाले के ऊपर से ले जाई जाए तो दूरी लगभग 240 मीटर रह जाएगी, लेकिन विद्युत विभाग ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए स्वीकार नहीं किया। विभाग की ओर से 340 मीटर लाइन निर्माण का लगभग 1 लाख 43 हजार 360 रुपये का एस्टीमेट प्रस्तुत किया गया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि याचिकाकर्ता विभाग द्वारा निर्धारित धनराशि जमा करता है तो उसे विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई एलटी लाइन याचिकाकर्ता के आवास से 300 मीटर के भीतर आ जाती है, तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
मामले के बाद बिजली कनेक्शन शुल्क से जुड़े नियम भी चर्चा में आ गए हैं। अधिवक्ता कृष्णा राम यादव व श्रीमती मोनू से संपर्क करने पर विद्युत विभाग के नए नियमों का पता चला उनके द्वारा बताया गया कि
क) “वैरियेबल लाइन चार्ज” को अब “सप्लाई अफोर्डिंग शुल्क” कहा जाएगा।
ख) विद्युतीकृत क्षेत्रों में 150 किलोवाट तक के विद्युत संयोजन हेतु निकटतम डिस्ट्रीब्यूशन मेन्स से अधिकतम 300 मीटर की दूरी के अंतर्गत आने वाले आवेदकों से आवेदन के समय एकमुश्त निर्धारित धनराशि जमा कराई जाएगी। इस 300 मीटर दूरी तक के संयोजनों को दो भागों — 100 मीटर तक तथा 101 मीटर से 300 मीटर तक — में विभाजित किया गया है। आवेदक द्वारा इन दूरी मानकों के आधार पर कॉस्ट डाटा बुक के अध्याय-5 ए के अनुसार सप्लाई अफोर्डिंग शुल्क देय होगा।
ग) विद्युतीकृत क्षेत्रों में 150 किलोवाट तक के विद्युत संयोजन हेतु आवेदक के परिसर की विद्यमान लाइन से दूरी 300 मीटर से अधिक होने पर प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार किया जाएगा तथा कॉस्ट डाटा बुक के अध्याय-5ए के अनुसार उपभोक्ता को अवगत कराया जाएगा।
ऊर्जा उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश बिजली कनेक्शन और लाइन शुल्क से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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