निडर पत्रकार बिक्रम प्रकाश ने खोली भ्रष्टाचार की पोल सच दिखाया तो मिली जान से मारने की धमकी

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रिपोर्टर केसरिया हिंदुस्तान

सुपौल जिला के सातनपार्टी वार्ड संख्या 12 में पंचायत सरकार भवन निर्माण कार्य में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर की गई ग्राउंड रिपोर्ट ने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। जहां आम लोग वर्षों से अधूरे पड़े निर्माण कार्य, घटिया सामग्री और बंद पड़े काम को देखकर निराश थे, वहीं पत्रकार बिक्रम प्रकाश ने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जमीनी हकीकत जनता के सामने लाने का साहसिक प्रयास किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि ढेर साल बीत जाने के बावजूद पंचायत सरकार भवन का आधे से भी कम काम पूरा हुआ है। पिछले कई महीनों से निर्माण कार्य बंद पड़ा है और निर्माण में घटिया सीमेंट, कमजोर ईंट, खराब सरिया और कमजोर पिलर के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी पैसे का सही उपयोग नहीं हुआ और निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई।
इसी मुद्दे को लेकर पत्रकार बिक्रम प्रकाश ने ग्राउंड रिपोर्ट तैयार कर सोशल मीडिया और जनता के सामने वास्तविक तस्वीर रखने का काम किया। रिपोर्ट सामने आने के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई और लोगों ने खुलकर अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पत्रकारिता की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
आरोप है कि खबर प्रसारित होने के बाद निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार द्वारा पत्रकार बिक्रम प्रकाश को फोन कर धमकी दी गई। कथित कॉल रिकॉर्डिंग में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए “औकात बता देंगे”, “जूता लेकर मारेंगे” और “जान से मरवा देंगे” जैसे शब्द कहे गए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार द्वारा संबंधित थाना में लिखित आवेदन भी दिया गया, जिसे पुलिस प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है।
मामला अब स्थानीय लोगों से लेकर सोशल मीडिया और अखबारों तक पहुंच चुका है। कई पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर खुलकर पत्रकार बिक्रम प्रकाश के समर्थन में सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि यदि पत्रकार सच दिखाने से डर जाएंगे, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा।
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। एक सच्चा पत्रकार वही होता है जो दबाव, डर और धमकी के बावजूद सच को जनता तक पहुंचाने का काम करे। बिक्रम प्रकाश ने जिस निडरता के साथ जनता से जुड़े इस मुद्दे को उठाया, वह आज युवा पत्रकारों के लिए एक उदाहरण बनता जा रहा है।
आज जरूरत इस बात की है कि समाज, प्रशासन और पत्रकार साथी मिलकर ऐसे लोगों के साथ खड़े हों जो सच और जनता के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि जब पत्रकार सुरक्षित रहेगा, तभी समाज की आवाज भी सुरक्षित रहेगी।
“निडर पत्रकार हमेशा सच का साथ देता है” — यह सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि पत्रकार बिक्रम प्रकाश के कार्य और साहस की पहचान बन चुकी है।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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