दैनिक केसरिया हिंदुस्तान पंकज जैन
अंबाह। नगर में बिना योग्य पैथोलॉजिस्ट के संचालित हो रही निजी पैथोलॉजी लैबों का मुद्दा अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है। शहर में दर्जनों लैब बिना निर्धारित मानकों के संचालित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक ठोस कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहे हैं। नियमों के अनुसार किसी भी पैथोलॉजी लैब का संचालन पंजीकृत एवं प्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट की निगरानी में होना अनिवार्य है। इसके अभाव में जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, जिससे मरीजों के उपचार पर सीधा असर पड़ सकता है। गलत रिपोर्ट के आधार पर गलत इलाज होने का खतरा भी बढ़ जाता है। सूत्रों की मानें तो कई लैबों में तकनीशियन ही जांच कर रिपोर्ट जारी कर रहे हैं, जबकि वहां कोई अधिकृत पैथोलॉजिस्ट मौजूद नहीं होता। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो नियमित निरीक्षण हो रहे हैं और न ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन अक्सर किसी बड़ी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। लोगों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के चलते अवैध लैब संचालकों के हौसले बुलंद हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही सीधे मानव जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इस मामले में सख्त कदम उठाना जरूरी है। अब आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग विशेष अभियान चलाकर सभी लैबों की जांच करे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि जनता को सुरक्षित और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। इनका कहना है कि। किसी भी पेथलोजी के खिलाफ शिकायत मिलती है। और नियमों नजर अंदाज कर किया तो अवश्य कारवाई करेंगे।
डॉ प्रमोद शर्मा बीएमओ अम्बाह
Author: Dainik kesariya Hindustan
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