मुनि श्री अनुकरण सागर महाराज जी का अम्बाह से पोरसा के लिए हुआ विहार

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान पंकज जैन

पोरसा में शाम 6 बजे ढोल नगाड़े के साथ जैन समाज ने भव्य आगवानी की, जगह जगह पुष्प वर्षा कर आरती उतार कर पाद प्रक्षालन भी किया
अम्बाह। पोरसा । आचार्य श्री अभिनंदन सागर महाराज जी के परम प्रभावक शिष्य पाठशाला प्रेरक बाल मुनि अनुकरण सागर महाराज जी आज दिनांक 6.5.2026 को दोपहर 3.30 बजे
से चारों मंदिर के दर्शन करते हुए
अम्बाह से पोरसा के लिए पद विहार किया। शाम 6 बजे ढोल नगाड़े के पोरसा जैन ने भव्य आगवानी की। जैन समाज ने जगह जगह पुष्प वर्षा एवं पाद प्रक्षालन कर आरती भी की।
जैन मुनियों का पद विहार (पैदल यात्रा) उनके तपस्वी जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा है। यह अहिंसा, त्याग और आत्म-साधना का प्रतीक है।जैन मुनि के पद विहार से संबंधित प्रमुख बातें यहाँ दी गई हैं:पैदल चलना (पद विहार): जैन मुनि वाहन का उपयोग नहीं करते हैं और हमेशा पैदल चलते हैं, जिसे ‘पद विहार’ कहा जाता है।उद्देश्य: यह पद विहार स्वयं को आत्म-साधना (वीतरागता) के करीब लाने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीने के लिए किया जाता है।अहिंसा का पालन: वे पैदल चलकर जीव-जंतुओं की रक्षा करते हैं। यह यात्रा सादगी और कड़े संयम के साथ की जाती है।यात्रा का समय: जैन मुनि आम तौर पर मानसून के दौरान एक ही स्थान पर रुकते हैं (जिसे चातुर्मास कहते हैं) और बाकी समय यात्रा करते हैं।समाज का सहयोग: विहार के दौरान, समाज के लोग मुनियों की सुरक्षा और मार्गदर्शन में मदद करते हैं।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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