– क्षेत्रीय नेता पुष्पेंद्र चुनाले पिछले दो सालों से उठा रहे है यमुना घाट का मुद्दा
बांदा। जनपद के पैलानी तहसील अंतर्गत यमुना घाट पर भ्रष्टाचार की ऐसी इबारत लिखी गई की राज्य मंत्री का साधारण घर महल में तब्दील हो गया और कई गांवों के सैकड़ों मकान विनाश की कगार पर आकर खड़े हो गए। करोड़ों रुपए की लागत से यमुना घाट में बनी पिचिंग में ऐसा भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी हुई की एक ही बाढ़ में पूरी पिचिंग बह गई और कटान ऐसा हुआ कि गांव के सैकड़ो मकान यमुना की जद में आ गए हैं।
भ्रष्टाचार और आने वाले विनाश की यह तस्वीरें पैलानी तहसील के ग्राम इछावर और लसड़ा की हैं। जहां वर्ष 2023 – 24 में करोड़ों रुपए की लागत से यमुना घाट में पिचिंग का कार्य कराया गया था ताकि विनाशकारी बाढ से होने वाले कटान को रोका जा सके लेकिन इस कार्य में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का ऐसा खेल खेला गया की यमुना की विनाशकारी बाढ के एक ही झटके में पिचिंग तहस नहस हो गई और मिट्टी में मिल गई…..
जनपद बांदा से चार नदियां होकर गुजरती है जिसमें यमुना और केन नदी मुख्य नदियां हैं जो बारिश के सीजन में विकराल रूप धारण करती हैं। वहीं चंद्रावल और बागे नदी भी पीछे नहीं रहती हैं। केन, बेतवा और चंद्रावल तीनों नदियां यमुना में जाकर मिल जाती हैं। डरावनी बात यह है कि पैलानी तहसील के दर्जनों गांव चंद्रावल, केन और यमुना नदी के बीच में आते हैं जो कि एक टापू की तरह बसा हुआ है। जिसके चलते सरकार ने 33 करोड़ रुपए का बजट पिचिंग के लिए पास किया था ताकि गांवों को कटान में होने वाली बरबादी से बचाया जा सके और केन सहित यमुना नदी के तटबंधों में पिचिंग का कार्य कराया गया लेकिन सब भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया।
ग्रामीणों ने कहा इस सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी बड़ी बात यह है कि शिकायत के बाद भी अब तक किसी ने संज्ञान नहीं लिया । क्षेत्रीय विधायक और जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद इसी क्षेत्र के है और इसी टापू के बीचों बीच उनका गांव घर है लेकिन वह नदियों के प्रकोप से दूर हैं। ग्रामीणों ने कहा पिचिंग का कार्य नहीं होता तो ज्यादा अच्छा था । सैकड़ो साल पुराना कुआं, वट वृक्ष और मंदिर सुरक्षित था । लेकिन अब सब बह गया आलम यह है कि ग्रामीण अब घट में अंत्येष्टि के लिए भी नहीं जा सकते कई लोग गिरकर घायल और विकलांग हो चुके हैं।
ग्राम इछावर से ज्यादा भयावह तस्वीरें ग्राम लसड़ा की है जहां पिचिंग के कार्य के बाद ऐसा कटान हुआ कि ग्रामीणों की जमीन और घर पिचिंग के साथ यमुना की धार में बह गए….
जनपद का ग्राम लसड़ा चिल्ला के करीब बसा हुआ है जहां यमुना का सबसे बड़ा पाठ है क्योंकि इसी गांव के घाट में आकर केन नदी यमुना से मिल जाती है जिसके चलते बाढ़ की त्रासदी सबसे ज्यादा यहां होती है। ग्रामीणों ने बताया कि पिचिंग के कार्य के पहले घाट किनारे उनकी काफी जमीन और घर बना था लेकिन पिचिंग के कार्य में जमकर भ्रष्टाचार हुआ जिसके चलते उनकी जमीन और घर नदी में समा गया । कई ग्रामीण गांव छोड़कर कहीं और बस गए । करीब एक सैकड़ा घर नदी की जद में हैं। इस वर्ष की बाढ़ में क्या होगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है ग्रामीण अब भगवान भरोसे जी रहे हैं।
वहीं इस पूरे मामले में नवागंतुक जिलाधिकारी अमित असेरी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा क्योंकि बारिश का सीजन करीब है जिलाधिकारी ने जिम्मेदार अधिकारी से पूरे मामले पर बात की है।
जनता की भलाई के लिए करोड़ों की लागत से बनी बीचिंग फिलहाल बंदर बांट की भेट चढ़ गई जिसमें सत्ताधारी भी शामिल हैं। इस भ्रष्टाचार में केवल रुपयों का बंदर बांट नहीं हुआ इसमें इंसानियत का भी बंटवारा हुआ है। अब देखने वाली बात यह है कि बांदा के नए डीएम इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं क्योंकि इलाकाई सत्ताधारी नेता ने तो मुंह फेर लिया है जिसे जनता ने अपना रहनुमा समझ कर विधानसभा पहुंचाया था।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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