लोनिवि बना फर्जीवाड़े गढ़ उच्चाधिकारियों को जिम्मेदार कर रहे गुमराह

SHARE:

जीतेंद्र शुक्ल
दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान

सीतापुर। भ्रष्टाचार मुक्त समाज को लेकर जहंा एक तरफ जिलाधिकारी का सख्त रवैया जनपदवासियों को नजर आ रहा है।वही अधिनस्थ मनमानी कार्यशैली अपनाकर सरकारी धनराशि का बंदरबांट करते हुए जिलाधिकारी को गुमराह कर रहे है बताते चले कि दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर शीर्षक डीएम दिखाते रहे सख्ती लोनिवि भ्रष्टाचार को देता रहा अंजाम खबर सोशल मीडिया पर आने के बाद सम्बन्धित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा खबर की जाचं के निर्देश लोनिवि के जिम्मेदार अधिशासी अभियन्ता निर्माण खण्ड, निर्माण खण्ड एक, निर्माण खण्ड चार व प्रान्तीय खण्ड को भेजी गई प्रकाशित खबर के तथ्य विभागीय अभिलेखों के अनुरूप जिम्मेदारों द्वारा बताते हुए जांच को निस्ताररित किया गया। जबकि हकीकतलोक निर्माण विभाग की कुछ और ही बयां कर रही है।

प्रकरण एक- निर्माण खण्ड एक के द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 143 कार्यो की स्वीकृत की गई जिसकी कुल लागत 1861.05 लाख दर्शाई गई। जिम्मेदार अधिशासी अभियन्ता के संरक्षण में 372.26लाख का अग्रिम भुगतान कार्यदाई संस्थाओं को दिया गया जबकि धरातल पर कार्य के नाम पर शून्य स्थिति है जबकि आवागमन बाधित हो रहा है राहगीरों को डेली बड़ी दुर्घटनाओं का समाना करना पड़ रहा है उदाहरण के तौर पर बिसवां सरैंया महमूदाबाद के किलोमीटर 06 से कटुवा सम्पर्क मार्ग दस अप्रैल की शिकायत के बाद 18 अप्रैल को अधिशासी अभियन्ता के द्वारा कार्य प्रारम्भ कराया गया। इसी प्रकार सोहरिया सम्पर्क मार्ग का कार्य शिकायत के बाद भी नही प्रारम्भ कराया गया जो कि भ्रष्टाचार के संकेत दे रहे है। साथ ही अधिशासी अभियन्ता सीतापुर खीरी वृत्त लोनिवि सीतापुर एवं अधिशासी अभियन्ता निर्माण खण्ड एक लोनिवि द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से प्रथम आमत्रंण में आमंत्रित निविदा एकल अर्ह निविदादाता को निविदा आमंत्रित भारी मात्रा में की गई जिसके साक्ष्य प्रमाण सहित शिकायत भी की जा चुकी है कार्यवाही लम्बित है। अन्य प्रकरण में अधिशासी अभियन्ता के द्वारा भारी मात्रा में आंवटित धनराशि का भुगतान डायवर्जन कर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है प्रमाण स्वरूप बिल बाउचर नम्बर 269 से लेकर 325 तक जो कि भुगतान डायवर्जन कियेजाने के प्रमाण दे रहे है।
प्ररकण दो- लोनिवि निर्माण खण्ड चार में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 104 कार्यो की स्वीकृत की गई जिसकी कुल लागत 1035.31 लाख शासन से मंजूर की गई। जिसमें कार्यदाई संस्थाओं को 207.16 लाख का भुगतान अधिशासी अभियन्ता के संरक्षण में किया गया जबकि कार्य की हकीकत कुछ और बयां कर रही है। अधिकतर कार्यो में अभी कार्य प्रारम्भ भी नही हुआ है जबकि कुछ कार्यो पर समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद कार्य प्रारम्भ हुआ है उदाहरण के तौर पर परसेहरानाथ बकसोहिया सम्पर्क मार्ग आदि साथ ही अधिशासी अभियन्ता निर्माण खण्ड केे द्वारा उन कार्यो पर भी भुगतान किये गये है जिन कार्यो पर निविदा पड़ी ही नही है। उदाहरण के तौर पर मकरेडा सम्पर्क मार्ग व यादवपुरवा सम्पर्क मार्ग जिन पर लाखों का भुगतान हो गया जबकि अधिशासी अभियन्ता द्वारा शासन को दिये गये अभिलेखों पर ही गौर किया जाये तो उक्त कार्यो पर निविदा ही नही पड़ी है जो कि भ्रष्टाचार के बड़े प्रमाण दे रहे है।
प्रकरण -तीन- जनपदवासियों को जाम की झाम से निजात कराये जाने के लिये शासन के द्वारा रोडवेज बस स्टैण्ड से लेकर पुलिस लाइन तक ओवर ब्रिज निर्माण हेतु कार्य स्वीकृत की गई जिस कार्य के निर्माण सेतु निगम को कार्य पूर्ण कराये जाने की जिम्मेदारी शासन द्वारा सौपी गई सेतु निगम अपने कार्य को तीव्र गति देने के लिये लगातार अपने कार्य पर ध्यान दे रहा है और जनपद वासियों को जल्द से जल्द जाम की झाम की झाम से निजात दिलाने के लिये प्रयासरत है लेकिन जहंा एकतरफ सेतु निगम कार्य को जल्द समाप्त करने के लिये प्रयासरत है वहीं दूसरी तरफ जिलाधिकारी के आदेशों को ताख पर रखकर अधिशासी अभियन्ता निर्माण खण्ड के द्वारा भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है जिसका प्रमाण यह है कि पूर्व वित्तीय वर्ष में बहुगुणा चैराहे से नैपालापुर सम्पर्क मार्ग दो लाइन से चार लाइन मरम्मत व नवीनीकरण निर्माण खण्ड के द्वारा कराया गया। जिसमें सरकारी धन के दुरूपयोग के प्रमाण स्पष्ट तौर पर दिखाई दे रहे है क्येाकि जब आवेर ब्रिज के लिये निर्धारित मार्ग पूर्व में सेतु निगम को सौपा जा चुका था तो उसके बाद जिम्मेदारों द्वारा सेतु निगम का निर्धारित मार्ग पर कार्य कराकर सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया। अगर जिम्मेदारों द्वारा उक्त धन का आम जन मानस के उपयोग में इस्तेमाल किया जाता तो एक विकास कार्य और होना संभव था क्येाकि कार्य होने के तत्काल बाद ही सेतुं निगम द्वारा उक्त कार्य की खुदाई कर दी गई।
प्रकरण -चार-वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रान्तीय खण्ड के द्वारा कुल 1397.60 लाख रूपये की लागत से 100 कार्यो की स्वीकृत शासन द्वारा दी गई जिसमें कार्यदाई संस्था को दिये गये आंकड़ो के अनुसार 279.87 लाख रूपये का अग्रिम भुगतान किया गया। जबकि कार्यालय प्रमुख अभियन्ता उ.प्र. लोनिवि लखनऊ को दर्शाएं गये कार्यो के अनुसार अधिकतर कार्यो पर भी कार्य प्रारम्भ नही हुआ है जिससे यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि अधिशासी अभियन्ता के द्वारा लगातार कार्यदाई संस्थाओं के साथ मिलकर बिना कार्य के ही आवंटित धनराशि का भुगतान कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। यह एक दो तो उदाहरण है सम्बन्धित विभाग के द्वारा लगातार सरकारी धन का बंदरबांट कर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है। जांच के नाम पर जिलाधिकारी के साथ उच्चाधिकारियों को भी अधिशासी अभियन्ताओं द्वारा गुमराह किया जा रहा है जैसे कि कार्यालय प्रमुख अभियन्ता उ.प्र. लोनिवि लखनऊ को भेजे गये दिनांक 31.01.2026 पत्रंाक संख्या 2718/सी/ 27 सी/ नवीनीकरण/ मूल/2026 को भेजे गये विवरयण के अनुसार निर्माण खण्ड चार अधिशासी अभियन्ता के अखिलेखों व धरातल पर कहीं दूर दूर तक मेल मिलाफ न होने से यह स्पष्ट हो रहा है कि अधिशासी अभियन्ता द्वारा भारी मात्रा मे ंआवंटित धनराशि का दुरूपयोग कर बंदरबांट किया जा रहा है।

————————

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई

पिपरिया भाजपा कार्यालय में गूंजा संगठन मंत्र, जिला महामंत्री मुकेश चन्द्र मैना ने कसी कार्यकर्ताओं की लगाम पूर्व जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल और मंडल अध्यक्ष बलराम ठाकुर ने किया प्रभारी का भव्य स्वागत