हमीरपुर
ब्यूरो चीफ कामिनी सिंह
भरुआ सुमेरपुर। क्षेत्र के ग्राम पंचायत बड़ागांव में कराए गए विकास कार्यों में तीसरी बार हुई जांच में भी छह लाख छप्पन हजार 302 रुपये का गबन पाया गया। वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर हाईकोर्ट ने कार्यवाही करने के आदेश दिए है।
बड़ागांव निवासी रमेश निषाद ने गांव में कराए गए विकास कार्यों में जमकर धांधली किए जाने की शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने टीम बनाकर जांच कराई,जिसमें स्पष्ट हुआ कि संबंधित कार्यों में निर्धारित टेंडर/निविदा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। न तो टेंडर फीस जमा की गई और न ही निविदादाताओं से जमानत राशि ली गई। जांच में यह भी पाया गया कि आवश्यक अभिलेख जैसे हैसियत प्रमाण पत्र आदि संलग्न नहीं किए गए और बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए कार्य आवंटित कर दिए गए। भुगतान प्रक्रिया में भी गड़बड़ी सामने आई, जहां एक ही प्रकार के व्यक्तियों को बार-बार भुगतान किया गया, जिससे वित्तीय नियमों का गंभीर उल्लंघन साबित हुआ। अभिलेखीय परीक्षण और स्थलीय निरीक्षण में फर्जी बिल-वाउचर, हस्ताक्षर रहित मस्टररोल और अपूर्ण माप पुस्तिकाएं मिलीं, जो भ्रष्टाचार और जालसाजी की ओर संकेत करती हैं। जांच में यह भी सामने आया कि ग्राम प्रधान के परिजनों के खातों में भुगतान किया गया, जिससे मिलीभगत के प्रमाण मिले हैं। इस जांच में कुल छह लाख छप्पन हजार 302 रुपये की अनियमितता पाई गई। प्रशासन द्वारा कार्यवाही न किए जाने पर शिकायत कर्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका भी दाखिल की थी। जिस पर प्रशासन ने जांच रिपोर्ट आने पर ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने के साथ कंसल्टिंग इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी थी और पंचायत सचिव ओमप्रकाश प्रजापति का स्थानांतरण कर दिया गया था। ग्राम प्रधान ने जांच में मनमानी का आरोप लगा कर पुनः जांच करने के लिए अनुरोध किया। जिस पर दूसरी बार की जांच में भी अनियमितता पाई गई। इस जांच से प्रधान के संतुष्ट न होने पर तीसरी बार जांच हुई। जिसमें एडीएम(वित्त/राजस्व) राकेश कुमार, परियोजना निदेशक डीआरडीए नवीन कुमार गुप्ता एवं मौदहा बांध के अधिशाषी अभियंता दिनेश कुमार जांच टीम में शामिल रहे। इन्होंने अपनी जांच में पहले हुई जांचों की पुष्टि की। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में ग्राम प्रधान हरदौल निषाद, तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश प्रजापति,लघु सिंचाई के अवर अभियंता महेश चंद्र एवं कंसल्टिंग इंजीनियर अनूप सोनी सहित अन्य संबंधित कर्मियों को दोषी ठहराया है। समिति ने इस मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी विभागीय और विधिक कार्रवाई की संस्तुति की है। साथ ही अनियमित रूप से खर्च की गई धनराशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। यह जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की गई। जिस पर 27 अप्रैल को मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि 25 अक्टूबर 2024 की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में आरोप स्थापित हुए थे। इसके बाद उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 के तहत कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रधान की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां भी सीज कर दी गईं।
अदालत को बताया गया कि 25 अप्रैल 2026 की अंतिम जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर दी गई है, जिसमें आरोपों की पुष्टि की गई है और आगे की कार्रवाई के लिए मामला जिलाधिकारी को भेजा गया है। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर शीघ्र और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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