विकसित भारत जी राम जी योजना को जिम्मेदारों ने बनाया कमाई का जरिया
दैनिक केसरीया हिंदुस्तान
सीतापुर (परसेण्डी)। विकास खण्ड परसेण्डी में विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता और श्रमिकों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम पंचायत उल्जापुर में चकमार्ग पर मिट्टी पटाई के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग और मानकों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान और रोजगार सेवक की मिलीभगत से जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में योजना के नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सरकारी धन के इस्तेमाल और ऑनलाइन दर्ज हाजिरी की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
ग्राम पंचायत उल्जापुर में प्रकाश के खेत से चकमार्ग तक मिट्टी पटाई का कार्य कराए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कार्यस्थल पर निर्धारित मानकों के अनुरूप मिट्टी पटाई कराने के बजाय पहले से बने चकमार्ग पर उगी घास की सफाई कर उसी चकमार्ग की मिट्टी से गड्ढों को भरने की खानापूर्ति की जा रही है। इससे कार्य की गुणवत्ता और सरकारी धन के सही उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
नियमानुसार चकमार्ग की पटाई के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों और कार्ययोजना के अनुरूप मिट्टी की व्यवस्था तथा कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके बावजूद यदि पुराने चकमार्ग की मिट्टी से ही गड्ढे भरकर पटाई दर्शाई जा रही है, तो इसकी तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है। आरोप यह भी है कि कार्य की वास्तविक स्थिति और अभिलेखों में दर्ज विवरण के बीच अंतर हो सकता है।
कार्य बंद होने पर भी हाजिरी दर्ज करने का आरोप
उल्जापुर में श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कार्य बंद रहने की स्थिति में भी प्रतिदिन करीब 100 श्रमिकों की हाजिरी दर्ज की जा रही है। दावा है कि इससे प्रतिदिन लगभग 30 हजार रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। हालांकि, इस धनराशि और हाजिरी की वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित अभिलेखों, मस्टर रोल तथा कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन से ही हो सकेगी।
सूत्रों के मुताबिक, रोजगार सेवक द्वारा ऑनलाइन हाजिरी रात में अपलोड किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि दर्ज उपस्थिति के समय वास्तव में कितने श्रमिक कार्यस्थल पर मौजूद थे और कितने लोगों ने काम किया। यदि अभिलेखों में दर्ज श्रमिकों की संख्या और मौके पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या में अंतर मिलता है, तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए।
भदियासी में भी उठे सवाल
ग्राम पंचायत भदियासी में भी मनरेगा कार्यों को लेकर इसी तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि यहां रोजगार सेवक द्वारा प्रतिदिन करीब 50 श्रमिकों की हाजिरी रात में दर्ज की जाती है, जबकि कार्यस्थल पर महज 8 से 10 श्रमिकों से काम कराए जाने का दावा किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह योजना के क्रियान्वयन और श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
दोनों ग्राम पंचायतों में लगाए जा रहे आरोपों के मद्देनजर कार्यस्थलों का स्थलीय निरीक्षण, ऑनलाइन हाजिरी, मस्टर रोल, कार्य की माप पुस्तिका और भुगतान संबंधी अभिलेखों का मिलान महत्वपूर्ण है। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि स्वीकृत कार्य के सापेक्ष मौके पर कितना काम हुआ और भुगतान किस आधार पर किया गया।
सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और गांवों में उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण कराने की है। ऐसे में योजना के नाम पर यदि कागजों में श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर या मानकों की अनदेखी कर भुगतान किए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। अब देखना यह है कि विकास खण्ड के जिम्मेदार अधिकारी इन आरोपों को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराते हैं या मामला कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहता है।







