जिला पंचायत ग्वालियर के परियोजना अधिकारी शिकायत शाखा में पदस्थ एस राजपूत के सानिध्य में घोटाले बाजों पर नहीं होती कर्यवाही

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ग्राम पंचायत पाटई में बनाई गई सीसी सड़क के निर्माण में मानकों की अनदेखी जांच अधिकारियों ने आखिर क्यों बंद कर दी जांच किसके हिस्से में कितना हिस्सा

दैनिक केसरीया हिंदुस्तान
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ग्वालियर जिले की जनपद पंचायत घाटीगांव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पाटई में सीसी सड़क निर्माण कार्य को लेकर हाल ही में गंभीर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप सामने आए हैं। हालिया खबर और मुख्य बिंदु:
• सीसी सड़क निर्माण में गड़बड़ी: अक्टूबर 2026 में सामने आई स्थानीय खबरों के अनुसार, ग्राम पंचायत पाटई में बनाई गई सीसी सड़क के निर्माण में मानकों की अनदेखी और वित्तीय अनियमितता (घोटाले) का मामला गर्माया हुआ है, जिससे स्थानीय अधिकारियों में भी हलचल है। शिकायतकर्ता के मुताबिक करोड़ों की राशि निकालने के बाद गुणवत्ता युक्त काम नहीं हुआ, नहीं कोई उसकी जानकारी आज तक मिल पाई है। भ्रष्टाचार की सारी हदें पार करती है पंचायत, जिसमें सरपंच को यह तक पता नहीं रहता कि किस जगह क्या हुआ है, कितना पैसा निकाला है। सरपंच को गांव से बाहर भेजकर लाखों-करोड़ों के अनियमित कार्य चल रहे हैं। पंचायत सचिव और उनके चाहने वाले शिकायतकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह बड़ा परेशान करने वाला प्रश्न है कि शिकायत शाखा संभाल रहे एस. राजपूत के सानिध्य में टीम गठित कर दी जाती है और उस पर जांच दल कार्रवाई के लिए आगे बढ़ता है। सारा कुछ सेटलमेंट का काम संभालने वाले एस. राजपूत हर एक मामले को दबा देते हैं और उस पर कार्रवाई नहीं होती है। आवेदक यूं ही भटकता रहता है। इसीलिए नरेगा से संबंधित कुछ कामों की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी। उसको आज 6 महीने से ज्यादा होने वाले हैं और उसमें प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। इससे लगता है कि परियोजना अधिकारी अपने बॉस से भी बड़े हैं।
हालांकि, इस पंचायत में 2023 में भी 35 लाख की राशि जमा करवाई गई थी, पर इस बार फिर प्रशासन का शिकंजा क्यों नहीं कस पाया? ग्वालियर से महाजपुर की दूरी पर ग्राम पंचायत पाटई में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। इसके जिम्मेदार जिला पंचायत में बैठे आका हैं।
• पूर्व का इतिहास: इस पंचायत में पहले भी विकास कार्यों और निर्माण में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी मानकों का पालन न करने के कारण सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पर कार्रवाई करते हुए उनसे लगभग 35 लाख रुपये की राशि जमा कराई गई थी।
अगले अंक में हम आपको इसकी व्यवस्थित जानकारी देंगे।

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