घाटीगांव जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत पाटई अजब और गजब है करोड़ों के विकास कार्य, सरपंच नहीं, फिर भी निकल रहा पैसा जिम्मेदार सचिव पर कार्यवाही कब

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शिकायत शाखा में पदस्थ परियोजना अधिकारी एस राजपूत इन सभी शिकायतों को दबाकर अपने रुतवे के दम पर शिकायतकर्ता को करते है गुमराह
रविन्द्र सिंह पवैया
9644811407
ग्वालियर की घाटीगांव जनपद पंचायत अजब और गजब है। करोड़ों के विकास कार्य हो रहे हैं, सरपंच नहीं हैं, फिर भी पंचायत से पैसा निकल रहा है। आखिर सरपंच के हस्ताक्षर से पैसा कौन निकाल रहा है? दबंग सरपंची कर रहे हैं।
हम आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की सरकार कहती है कि हम शोषित, वंचित उन आदिवासियों की सरकार हैं, जिन्हें आज तक हक और अधिकार नहीं मिला। उनके हक की बात करने वाली सरकार है मध्य प्रदेश की सरकार।
सरकार में बैठे षड्यंत्रकारी सचिव और रोजगार सहायक लगातार करोड़ों रुपये का हरण करते जा रहे हैं। विकास कार्य के नाम पर सीसी रोड पर गुणवत्ता बिहीन कार्य किया जा रहा है। इस पंचायत मैं सचिन और रोजगार सहायक पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

सूत्र बताते हैं कि जनपद पंचायत अध्यक्ष घाटीगांव के परिवार के लोग पूर्व में भी कई वर्षों तक सरपंच रहे हैं। उनका रुतबा और दबदबा इस कदर है कि कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है। अंदरूनी बातें बताई गई हैं कि पंचायत को चलाने वाले जनपद अध्यक्ष घाटीगांव हैं। इस बात की पुष्टि केसरीया हिंदुस्तान नही करता इस विषय पर जल्द जनपद अध्यक्ष घाटीगांव का पक्ष आप सबके बीच रखा जाएगा इस बात पर हम उनसे भी चर्चा करेंगे।
लेकिन जब केसरिया हिंदुस्तान की टीम ने ग्राम पंचायत पाटई के उपसरपंच देवेंद्र रावत से चर्चा की, तो बताया गया कि बरसों से ग्राम पंचायत में कोई भी बैठक नहीं हुई। आखिर बैठक किसके घर में और कहां होती है?
पंचायत में पंच चुने जाते हैं। उन पांचों को भी आज तक मानदेय नहीं दिया गया। आखिर इस मानदेय को कौन खा रहा है?
इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं हमारे पंचायत सचिव सतेंद्र सिंह गुर्जर, जो कि ग्राम पंचायत पाटई में सचिव हैं। ग्राम पंचायत के उपसरपंच लगातार शिकायत करते रहते हैं और उस पर कार्रवाई करने की हिम्मत जनपद पंचायत सीईओ में नहीं है। जनपद पंचायत के सीईओ अगर कार्रवाई करते हैं, तो उनके ऊपर भी उनके आका बैठे हुए हैं।
देखना होगा कि इस खबर के बाद इन सभी से हम चर्चा करके आपके सामने उनका पक्ष रखेंगे।
केसरिया हिंदुस्तान लगातार भ्रष्ट अफसरों और सही दिखने वाले कमीशनखोरी के मामलों का पर्दाफाश करता आया है।
प्रशासन बना मूकदर्शक, सरपंच नहीं पंचायत में, फिर भी निकले लाखों रुपये, जिम्मेदारों के मुंह पर लगा ताला।
इस जगह पर अगर कोई गरीब व्यक्ति किसी के सौ रुपये निकाल लेता, तो आज प्रशासन उसके घर पर बुलडोजर तक चलाने को तैयार हो जाता। लेकिन यहां तो करोड़ों रुपये तीन वर्ष से सरपंच नहीं होने के बाद भी निकाल लिए गए और उस पर काम किया जा रहा है।
आखिर मोबाइल नंबर किसका डाला है? इसकी जांच की जाए। इसमें हम आपको बता दें कि जिला पंचायत के शिकायत शाखा संभाल रहे मास राजपूत की भी भूमिका हो सकती है आए दिन शिकायत कर रहे हो सरपंच दिन की शिकायत पर आए दिन तक कोई कार्रवाई नहीं होना जिला पंचायत के संज्ञान में रहना या प्रश्न चिन्ह उठना है की शिकायत शाखा में पदस्थ परियोजना अधिकारी एस राजपूत इन सभी शिकायतों को दबाकर अपने बचत के दम पर शिकायतकर्ता को गुमराह कर से लाखों रुपए की हेरा फेरी का काम करते हैं जाकर शिकायतकर्ता की शिकायत सुनी गई होती तो आज इंटरेस्ट पंचायत के सचिव ओर रोजगार सहायकों पर कार्रवाई हो गई होती ईसी से मिलती-जुलती जब जानकारी सूचना के अधिकार में मांगी गई तो एस राजपूत छय माह से बचते नजर आ रहे हैं इसकी अधिक जानकारी जल्द आपके बीच खुलासा करेंगे

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