मीटर रीडिंग में हेराफेरी कर बिल बढ़ाने और सरकारी योजना का अनुचित लाभ दिलाने की शिकायतें, विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
दैनिक केसरीया हिंदुस्तान।
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ग्वालियर में बिजली विभाग के अधिकारी जहां राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मीटर रीडिंग करने वाले कर्मचारियों की कथित मनमानी के कारण बिजली उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी लोगों के बीच पहुंचकर समय पर बिजली बिल जमा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और समय पर भुगतान के फायदे भी बता रहे हैं, लेकिन मीटर रीडिंग में कथित गड़बड़ी के आरोप विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
कुछ क्षेत्र में नही पहुंच रहे मीटर रीडर, मनमानी रीडिंग से बढ़ रही परेशानी
उपभोक्ताओं के घरों में बिजली के मीटर लगे होने के बावजूद आरोप है कि कई क्षेत्रों में मीटर रीडर नियमित रूप से समय पर रीडिंग लेने नहीं पहुंचते। इसके चलते उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में वास्तविक खपत और दर्ज रीडिंग के बीच अंतर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के बजाय उसे सुधरवाने के लिए बिजली कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
<span;>300 यूनिट की रीडिंग को 100 यूनिट दिखाने के आरोप
कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर रीडिंग में कथित हेराफेरी कर वास्तविक खपत से कम या अधिक रीडिंग दर्ज की जाती है। शिकायतों के अनुसार, कुछ मामलों में 300 यूनिट की वास्तविक रीडिंग को 100 यूनिट के आसपास दर्ज कर कम बिल बनाया जाता है। वहीं, अन्य मामलों में उपभोक्ताओं को अधिक बिल देकर परेशान किए जाने के आरोप भी हैं।
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ मीटर रीडर उपभोक्ताओं को रीडिंग कम कराने के तरीके बताकर कथित रूप से आर्थिक लाभ लेते हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह बिजली विभाग की बिलिंग व्यवस्था और राजस्व व्यवस्था के लिए गंभीर मामला हो सकता है।
<span;>16 हजार रुपये वेतन, डेढ़ लाख रुपये तक की कथित कमाई की चर्चा
शिकायतों में कुछ मीटर रीडरों की आय और कथित अवैध कमाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि लगभग 16 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारी अनियमितताओं के जरिए बड़ी रकम अर्जित कर रहे हैं। हालांकि, डेढ़ लाख रुपये प्रतिमाह तक की कथित कमाई के दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
इसके अलावा, कुछ लोगों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि मीटर रीडरों से उनके अधिकारी तक हर महीने लगभग 5 हजार रुपये पहुंचाए जाते हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।
<span;>इंदिरा गांधी ज्योति योजना में भी कथित गड़बड़ी के आरोप
मामले में इंदिरा गांधी ज्योति योजना के अंतर्गत लाभ दिए जाने वाली रीडिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ उपभोक्ताओं के मीटर में दर्ज वास्तविक रीडिंग और विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज रीडिंग में अंतर हो सकता है। आरोप है कि जेएमएनआई अथवा संबंधित बिलिंग प्रणाली में रीडिंग संपादित कर कंपनी को भेजे जाने की आशंका है, जिससे योजना के लाभ की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
<span;>शिकायत में सामने आए दो मामले
1. उपभोक्ता मीना का मामला: शिकायत के अनुसार, मीना के बिजली मीटर में दर्ज वास्तविक रीडिंग और योजना के अंतर्गत दर्ज कराई गई रीडिंग की जांच की जानी चाहिए। आरोप है कि रीडिंग में कथित बदलाव के जरिए योजना का लाभ दिलाया जा रहा है। इस मामले में मीटर की वास्तविक रीडिंग, मौके पर जांच और विभागीय रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।
2. उपभोक्ता मुन्नी देवी का मामला: शिकायत में मुन्नी देवी के नाम से भी इंदिरा गांधी ज्योति योजना के तहत रीडिंग में कथित अनियमितता का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मीटर रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही, उपभोक्ताओं को कथित रूप से अधिक बिल देकर दबाव बनाने के आरोपों की भी पड़ताल होनी चाहिए।
<span;>जांच और कार्रवाई की मांग
पूरे मामले में बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की जा रही है कि संबंधित क्षेत्रों में मीटर रीडिंग का औचक निरीक्षण कराया जाए। उपभोक्ताओं के मीटर की मौके पर रीडिंग लेकर विभागीय रिकॉर्ड और बिलों का मिलान किया जाए। साथ ही, इंदिरा गांधी ज्योति योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं के मामलों की भी नियमानुसार जांच की जाए।
यदि मीटर रीडिंग में हेराफेरी, अनुचित आर्थिक लेनदेन या अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है।







