आखिर जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों ?
जिला पंचायत ग्वालियर की शिकायत शाखा पर सवाल: पाँच महीने बाद भी मनरेगा संबंधी जानकारी का इंतजार?
रविंद्र सिंह पवैया
9644811407
ग्वालियर। जिला पंचायत ग्वालियर की शिकायत शाखा की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शिकायत शाखा का दायित्व संभाल रहे परियोजना अधिकारी एस. राजपूत को लेकर सूत्रों के हवाले से कई तरह की चर्चाएँ सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें विभिन्न जनपद पंचायतों से प्राप्त शिकायतों और उनसे संबंधित मामलों की विस्तृत जानकारी रहती है।
सूत्रों के अनुसार, राजपूत विभागीय मामलों को समझने और शिकायतों से संबंधित प्रक्रियाओं को संचालित करने में अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। लेकिन शिकायत शाखा की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ सवाल ऐसे हैं, जिनका जवाब विभागीय स्तर पर मिलना आवश्यक है।
शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों द्वारा विभिन्न जनपद पंचायतों से संबंधित शिकायतों के निपटारे और उनकी निगरानी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का दावा है कि शिकायतों की जाँच के लिए गठित समितियों की रिपोर्ट शिकायत शाखा तक पहुँचती है, जिसके बाद संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि शिकायतों की जाँच, रिपोर्ट तैयार करने और उनके निराकरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभाग में कौन-सी व्यवस्था लागू है। साथ ही, शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा का पालन किस प्रकार किया जा रहा है?
पाँच महीने बाद भी जानकारी नहीं मिलने का आरोप
मामला मनरेगा से संबंधित जानकारी के आवेदन का भी बताया जा रहा है। आवेदनकर्ता का आरोप है कि लगभग पाँच महीने बीत जाने के बावजूद उसे माँगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इस दौरान उसे लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़े और जानकारी मिलने की उम्मीद में इंतजार करना पड़ा।
आवेदनकर्ता का कहना है कि उसे आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। यदि निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह जाँच का विषय है कि देरी के लिए कौन जिम्मेदार है और आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एक कर्मचारी के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी को मामले की जानकारी थी। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब सामने आना अभी बाकी है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी से कार्रवाई की अपेक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला पंचायत ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर शिकायत शाखा की कार्यप्रणाली और मनरेगा संबंधी आवेदन में हुई देरी की निष्पक्ष जाँच कराएँगे?
क्या संबंधित अभिलेखों की जाँच कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि आवेदनकर्ता को समय पर जानकारी क्यों नहीं मिली? यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी?
फिलहाल, इन सवालों के जवाब विभागीय जाँच और संबंधित अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेंगे।
अगले अंक सोमबार में: जिला पंचायत ग्वालियर की शिकायत शाखा से जुड़े अन्य मामलों, शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया और सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर तथ्यात्मक पड़ताल प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा।







