मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इस मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई
रविंद्र सिंह पवैया | ग्वालियर
9644811407
ग्वालियर। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। इस कानून के तहत आम नागरिक सरकारी विभागों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन ग्वालियर जिला पंचायत में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। RTI कार्यकर्ता रविंद्र सिंह पवैया ने आरोप लगाया है कि मनरेगा से संबंधित शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगने के बावजूद उन्हें चार माह से अधिक समय बीत जाने पर भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
<span;>अपीलीय अधिकारी के निर्देश के बाद भी नहीं मिली जानकारी
रविंद्र सिंह पवैया के अनुसार, उन्होंने जिला पंचायत ग्वालियर में मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों से संबंधित शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा था। इसमें शिकायत आवेदन, संबंधित प्रतिवेदन, कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और नोटशीट सहित अन्य अभिलेखों की जानकारी शामिल थी।
उनका कहना है कि प्रथम अपील के बाद अपीलीय अधिकारी द्वारा संबंधित लोक सूचना अधिकारी को जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कथित तौर पर अब तक उन्हें मांगी गई जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभागीय स्तर पर जानकारी देने के निर्देश जारी किए गए, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ?
<span;>परियोजना अधिकारी एम.एस. राजपूत की भूमिका पर उठाए सवाल
RTI कार्यकर्ता ने परियोजना अधिकारी एम.एस. राजपूत पर जानकारी उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने और उन्हें लगातार गुमराह किए जाने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से मनरेगा से संबंधित शिकायतों की जांच और उन पर हुई कार्रवाई की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
पवैया ने सवाल उठाया कि आखिर संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है? क्या इसके पीछे विभागीय लापरवाही है या फिर किसी मामले से जुड़े दस्तावेज सामने आने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है? हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
<span;>मुख्य कार्यपालन अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल
रविंद्र सिंह पवैया के अनुसार, उन्होंने 19 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 19(1) के तहत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत ग्वालियर के समक्ष प्रथम अपील प्रस्तुत की थी। उनका आरोप है कि अपील के बाद भी उन्हें अब तक मांगी गई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अपीलीय स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, तो संबंधित अधिकारी उनका पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कर पाए? क्या मुख्य कार्यपालन अधिकारी को इस मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं है, तो अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
<span;>मनरेगा की शिकायतों और दस्तावेजों की जांच की मांग
RTI कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि मनरेगा से जुड़ी शिकायतों तथा पंचायत स्तर पर हुई कार्रवाई के अभिलेखों की जानकारी नहीं मिलने से कई सवाल अनुत्तरित हैं। उन्होंने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
पवैया का कहना है कि यदि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाती है, तो अन्य शिकायतों और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े तथ्य भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से जांच कराने की संभावना का भी उल्लेख किया है।
<span;>अब आगे क्या?
इस पूरे मामले में जिला पंचायत ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और संबंधित लोक सूचना अधिकारी का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रथम अपील पर क्या आदेश जारी हुए, उनका पालन किस स्तर पर लंबित है और आवेदक को मांगी गई जानकारी कब तक उपलब्ध कराई जाएगी।
सवाल यह है कि जब सूचना का अधिकार कानून आम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, तो विभागीय स्तर पर जानकारी मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है? अब देखना होगा कि जिला पंचायत प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और RTI कार्यकर्ता को मांगी गई जानकारी कब तक उपलब्ध कराई जाती है।







