संस्कार, विज्ञान और चरित्र का समन्वय ही सच्ची शिक्षा” : दीपक दुबे

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान राजू मेहरा भोपाल.9425727854

बैरसिया।। सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर, विद्या विहार बैरसिया में आयोजित आचार्य अभ्यास वर्ग प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना-प्रार्थना के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विषय प्रस्तोता अर्जुन शिक्षा समिति बैरसिया के व्यवस्थापक दीपक दुबे ने “शिक्षा की वर्तमान चुनौतियां एवं हमारी भूमिका” विषय पर आचार्यों का मार्गदर्शन किया।अपने उद्बोधन में श्री दुबे ने कहा कि शिक्षा का विषय केवल शिक्षक और विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि “सा विद्या या विमुक्तये” अर्थात जो अज्ञान के अंधकार से मुक्त करे, वही वास्तविक शिक्षा है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मनुष्य को संस्कारित, जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाती है। वर्तमान समय में नई पीढ़ी को विज्ञान एवं तकनीक के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। जो समाज अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूल जाता है, उसका भविष्य भी कमजोर हो जाता है।
श्री दुबे ने कहा कि यदि विद्यार्थी परिश्रम करें, शिक्षक समर्पित भाव से कार्य करें, अभिभावक सहयोग दें और समाज जागरूक बने, तो शिक्षा क्षेत्र की अधिकांश चुनौतियों का समाधान संभव है। हमें ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जो चरित्र का निर्माण करे, मनोबल बढ़ाए, बुद्धि का विकास करे तथा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे।
कार्यक्रम में विज्ञान प्रयोग का प्रदर्शन श्रीमती चंद्रकांता दांगी द्वारा किया गया। इस अवसर पर समिति के सहसचिव श्री यतीश शर्मा, प्राचार्य श्री सुनील कुमार नागर, प्रधानाचार्य श्री पृथ्वीराज दांगी (शिशु मंदिर जैन कॉलोनी) सहित विद्या विहार बैरसिया के सभी आचार्य एवं दीदी उपस्थित रहे।

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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