वृक्षों के प्रति सद्भाव हो तभी वायुमंडल में होगा सुधार – शुक्ला

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बांदा। पांच जून को बहुत सी तस्वीरें वायरल हुई वरिष्ठ से वरिष्ठ लोगों ने पौधारोपण करने की तस्वीरें खिंचवाई कुछ समय बाद उनमें से ज्यादातर लोग यह तक भूल जायेंगे उन्होंने पौधा कहां लगाया है तपते बांदा को देखकर आने वाली पीढ़ी के समय उत्पन्न होने वाले संकट जब गर्मियों में कूलर ऐसी भी काम ना सके आज की स्थिति के हिसाब से समझा जा सकता है खत्म होते जंगल नष्ट होते पहाड़ सहित अन्य बहुत से मुद्दे हैं जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन किया जा रहा है।
समाजसेवी सुमित शुक्ला ने जिम्मेदारों से अपील करते हुए कहा है कि आज के बांदा को रिकार्ड बनाने की आवश्यकता नहीं है बल्कि वृक्षों को बचाने तथा पौधों को तैयार करने की चुनौती है लोगों के मन में वृक्षों के प्रति अच्छी भावना जागृत करने का लक्ष्य सामने है जिसे पूरा करने का संकल्प राजनेता अधिकारी मीडिया समाजसेवी तथा आम नागरिकों को मिलकर लेना होगा पहले के लोग पौधारोपण कर उसकी पुत्रवत सेवा तब तक करते थे जब तक वह पौधा वृक्ष का आकार नहीं ले लेता था पूर्ववर्ती लोगों में शिक्षा का अभाव जरूर था किन्तु वो सामाजिक ज्ञान से परिपूर्ण थे वृक्षों का हमारे जीवन में क्या महत्व है इसको भली-भांति समझते थे।
आज के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों पूर्व के वृक्ष बहुतायत में दिखाई देते हैं परन्तु नये वृक्षों की संख्या सीमित है अतः प्रशासन व राजनेताओं को कम से कम एक से पांच पौधे प्रत्येक व्यक्ति तक उसके घर तक पहुंचा कर जागरूकता का संदेश दे जिससे वह व्यक्ति उन पौधों को आसानी से तैयार कर अच्छे से देखभाल कर लेगा किन्तु एक व्यक्ति , प्रशासन अथवा राजनेता द्वारा अकेले ही हजारों या लाखों की तादाद में पौधे रोपित करने के बाद देखभाल व सेवा के बिना नष्ट हो जाते हैं जो मेरी समझ में गर्भ में शिशु हत्या के समान है नागरिकों में विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में पौधे उपलब्ध कराने से उनमें वृक्षों के प्रति अपनत्व व जागरूकता का भाव आयेगा जो वातावरण व पर्यावरण के लिए सहायक सिद्ध होगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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