हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर डां. गुलाबचंद भारद्वाज की पंक्तियां

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दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान से चंद्रशेखर बरेठ
जांजगीर-चांपा // मित्रों आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है, आज के ही दिन आज से २०० साल पहले भारत की प्रथम हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड ३० मई १८२६ दिन मंगलवार को प्रकाशित हुई थी। इस समाचार पत्र के संपादक और प्रकाशक पंडित जुगल कुशल किशोर शुक्ल जी थे। बड़े गर्व और सौभाग्य की बात है कि आज ४२००० से अधिक पंजीकृत हिंदी समाचार पत्र भारत में प्रकाशित है। हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मेरी चंद पंक्तियां आप सभी को सादर समर्पित है। आप सभी को हिन्दीं पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
डॉ. गुलाब चंद भारद्वाज
‘विद्यासागर’
संवाद स्थापित करने जुगल किशोर जी आज,
समाचार एक पत्र निकाला उदंत मार्तंड खास।
मतलब जिसका उगता सूरज अंधकार मिटाने,
सेतु बनाने लोगों के बीच यारों संवाद बढ़ाने।
कलम जब सच की मशाल बन जाती है,
तो अंधेरों की हर दीवारें स्वतः ढह जाती है।
पत्रकारिता महज खबरों का व्यापार नहीं,
यह जन-जन के अधिकारों की आवाज़ है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है पत्रकारिता,
जनहित और जनजागरण इसकी है वास्तविकता।
कलम बिके न सत्ता से, न झुके किसी के प्रभाव,
जनमन की पीड़ा लिख सके, वही है इसका भाव।
सच की लौ को आँधियों में भी जलाए रखना,
कलम को जनहित की दिशा में ही चलाए रखना।
सच की खातिर जो लिखे, न डरे किसी का दबाव।
पत्रकारिता सार्थक वही, जो रखे जन-हित का भाव।
जो समय की धड़कनों को शब्द देता है,
वही समाचार पत्र समाज का दर्पण बनता है।
बीके कभी न पैसों के बल, न सत्ता की रखैल,
जिंदा रखे जो लोकतंत्र को स्तंभ चौथा मेल।।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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