मृत लोगों के आधार और पैन कार्ड से 11 ट्रेक्टरों पर लिया 60 लाख लोन मथुरा में फाइनेंस कंपनी की जांच में खुला खेल; 60 लाख का हो गया गबन

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान फैसल कुरैशी

—एचडीबी फाइनेंस कंपनी के सीनियर सेल्स ऑफिसर के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज
— एचडीबी फाइनेंस कंपनी नए और पुराने वाहनों पर ऋण कराती है उपलब्ध
मथुरा। एचडीबी फाइनेंस कंपनी को सीनियर सेल्स ऑफीसर लोन बांटने जरिए चूना लगाता रहा और किसी को खबर तक नहीं लगी। आधार कार्ड और पैन कार्ड हासिल कर मर चुके लोगों के नाम पर लोन स्वीकृत कर रकम निकाल ली गई। किस्तें जमा न होने पर जब वसूली टीम बकाएदारों के घर पहुंची, तब खेल सामने आया। सीनियर सेल्स ऑफीसर के खिलाफ 60 लाख रुपये से अधिक के गबन का मुकदमा दर्ज कराया है। कंपनी के विधिक सलाहकार रवि ठाकुर ने बताया कि एचडीबी फाइनेंस कंपनी नए और पुराने वाहनों पर ऋण उपलब्ध कराती है।
इस कंपनी में मांट के मनीगढ़ी बांगर पैगलतू निवासी राजकुमार ने 11 अक्टूबर 2023 से छह अगस्त 2025 तक कोसीकलां शाखा पर सीनियर सेल्स आफिसर के पद पर रहते हुए वित्तीय अनियमितताएं कीं। राजकुमार ने ट्रैक्टर स्वामियों के नाम पर फर्जी तरीके से लाखों रुपये का ऋण बांट दिया।
इसमें ट्रैक्टर स्वामियों के आधार कार्ड व पैन कार्ड के साथ उनकी जन्मतिथि और फोटो बदलकर ऋण अपने खास लोगों को दे दिए। ऐसे लोगों को भी ऋण बांट दिया, जो जीवित ही नहीं हैं। जब टीम बकाएदारों के घर पर वसूली के लिए गई तो हकीकत जान दंग रह गई।
नौहझील क्षेत्र के तिलकगढ़ी निवासी हीरा सिंह के नाम से 4.57 लाख रुपये का ऋण दिया गया, जिसमें उनकी फोटो अलग थी। वहीं महेंद्री देवी की जन्मतिथि और फोटो बदलकर 6.67 लाख रुपये का ऋण दिया गया। ओमप्रकाश को 5.52 लाख, कुंवरपाल को 6.42 लाख रुपये का ऋण दिया गया।
जिन तिथियों में लोन स्वीकृत किया गया, उससे पहले इनकी मौत हो चुकी थी। इसी तरह नौहझील क्षेत्र के ही मुकेश को 5.41 लाख, जगदीश को 7.17 लाख रुपये, सुभाष को 6.17 लाख, फूल सिंह को 6.85 लाख, रघुवीर चौधरी को 5.23 लाख और सियाराम को 5.72 लाख रुपये का ऋण दिया गया। लेकिन इनके बारे में कोई जानकारी ही नहीं मिली।
सेल्स ऑफीसर राजकुमार ने कंपनी के अन्य ग्राहकों की ईएमआइ लेकर कंपनी के खाते में जमा नहीं की। इस तरह 60 लाख रुपये का गबन सामने आया है। कंपनी के कलेक्शन मैनेजर सत्येंद्र कुमार की तहरीर पर थाना सदर बाजार में राजकुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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पहले कंपनी, फिर पुलिस ने की जांच
जब सेल्स ऑफीसर राजकुमार की अनियमिता सामने आई तब अगस्त 2025 को कंपनी ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए हटा दिया। इसके बाद कंपनी ने अपने स्तर से जांच पड़ता की कि आखिर यह अनियमितता कितनी बड़ी थी। जब तस्वीर साफ हुई तो 22 दिसंबर 2025 को कंपनी की ओर से एसएसपी श्लोक कुमार को शिकायत दी गई। एसएसपी ने जांच सीओ आइपीएस आशना चौधरी को सौंपी। सीओ ने जांच पूरी करने के बाद 18 मई को थाना सदर बाजार में मुकदमा दर्ज कराया।

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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