भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान
सतना।स्वच्छ भारत अभियान और रेलवे के ‘कायाकल्प’ के बड़े-बड़े दावों की धज्जियां उड़ानी हो, तो सतना रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर चले आइए। वीआईपी प्लेटफॉर्म कहे जाने वाले इस ट्रैक पर फैली भारी गंदगी और सड़ते कचरे ने यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है। स्टेशन के सबसे मुख्य हिस्से में पसरी यह गंदगी रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को बयां कर रही है।
गंदगी का अंबार, बदबू से हाल बेहाल
प्लेटफॉर्म नंबर एक पर जैसे ही कोई ट्रेन आकर रुकती है, यात्रियों का स्वागत दूर तक फैली बदबू और ट्रैक पर जमा प्लास्टिक, जूठन और सड़ते हुए कचरे से होता है। हालत यह है कि
सांस लेना दूभर: प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों को मुंह पर कपड़ा ढककर ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है।
बीमारियों को न्योता: भीषण गर्मी के इस मौसम में पटरियों पर सड़ रहा कचरा मच्छरों और भयंकर संक्रमण को दावत दे रहा है।
दिखावे की सफाई: सफाई के नाम पर लाखों का टेंडर होने के बावजूद जमीनी हकीकत शून्य नजर आ रही है।
वीआईपी प्लेटफॉर्म का यह हाल, तो बाकी भगवान भरोसे!
आमतौर पर किसी भी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक को सबसे ज्यादा साफ और सुसज्जित रखा जाता है, क्योंकि अधिकारियों से लेकर वीआईपी तक का मूवमेंट यहीं होता है। लेकिन सतना स्टेशन के इस ट्रैक को देखकर लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी एयरकंडीशनर कमरों से बाहर निकलकर हकीकत देखना ही नहीं चाहते।
यात्रियों का फूटा गुस्सा:
टिकट के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सुविधाओं और सफाई के नाम पर यात्रियों को सिर्फ नरकीय स्थिति मिल रही है। प्लेटफॉर्म पर 10 मिनट खड़ा होना भी सजा जैसा लगता है।एक आक्रोशित यात्री
रेलवे प्रशासन को इस कुंभकर्णी नींद से जागना होगा। अगर जल्द ही इस भारी गंदगी को साफ कर ट्रैक को दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह स्टेशन स्वच्छ रेल की रैंकिंग में तो फिसलेगा ही, साथ ही यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का बड़ा कारण भी बनेगा।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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