दैनिक केसरिया हिंदुस्तान संवाददाता वीरू
पीलीभीत। स्मार्ट मीटर को लेकर हालात अब सामान्य विरोध से आगे बढ़कर सीधे टकराव में बदलते दिखाई दे रहे हैं। जनहित पावर के तहत लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (भानू) के बैनर तले किसानों और महिलाओं का गुस्सा उस वक्त खुलकर सामने आया, जब उन्होंने विद्युत विभाग परिसर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए विभाग की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप जड़ दिए। पूरे परिसर में एक ही आवाज गूंजती रही—“यह स्मार्ट मीटर नहीं, जनता की जेब काटने वाला मिनी एटीएम है।”
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना था कि गांवों में उनकी सहमति के बिना जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और इसके बाद बिजली बिलों में अचानक कई गुना बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारी पहले मीटर लगाने के लिए दबाव बनाते हैं और फिर उपभोक्ताओं को ज्यादा खर्च का डर दिखाकर चुप करा देते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पहले जहां बिजली का खर्च सीमित और संभालने लायक था, वहीं अब हर महीने आने वाला बिल किसी बोझ से कम नहीं रह गया है।
महिलाओं ने भी खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर की और कहा कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर ने उनके घरों की व्यवस्था बिगाड़ दी है। जैसे ही बैलेंस खत्म होता है, बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बीच में रुक जाती है और बीमार परिजनों की देखभाल तक प्रभावित होती है। उनका कहना था कि यह व्यवस्था गांव के लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि नई मुसीबत बनकर आई है।
यूनियन नेताओं ने अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपते हुए पूरनपुर, शेरपुर कलां सहित जिले के कई गांवों में लगाए गए स्मार्ट मीटरों को हटाने की मांग की। उनका साफ कहना था कि जिन उपभोक्ताओं की सहमति नहीं ली गई, वहां लगे मीटर तुरंत हटाए जाएं और सभी कनेक्शनों को फिर से पोस्टपेड व्यवस्था में बदला जाए। साथ ही बढ़े हुए बिजली बिलों की निष्पक्ष जांच कराकर उनमें संशोधन किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
भाकियू (भानू) के जिला अध्यक्ष भजनलाल क्रोधी और मंडल अध्यक्ष लाल मिश्रा ने बेहद सख्त लहजे में प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 20 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान खुद स्मार्ट मीटर उखाड़ने के लिए मजबूर होंगे और उसके बाद होने वाले किसी भी हालात की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि पूरे जिले में फैलाया जाएगा और जरूरत पड़ी तो बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
प्रदर्शन में मौजूद अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष निसार शाह, जिला मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र गुप्ता, तहसील मीडिया प्रभारी सबलू खान, तहसील अध्यक्ष रुसान अहमद, रामनिवास कश्यप, मीनू बरकाती, मोंटू, सलमान, दिलशाद, नजीब, शाहिद समेत बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता इस मुद्दे पर एकजुट नजर आए।
पूरा मामला अब सिर्फ बिजली बिल या मीटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण उपभोक्ताओं के भरोसे और उनकी आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या “स्मार्ट मीटर” वास्तव में सुविधा का माध्यम हैं या फिर आम आदमी की जेब पर सीधा वार साबित हो रहे हैं। फिलहाल नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है और किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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