केसरिया हिंदुस्तान गुना व्यूरो चीफ गोलू सेन
जिला अध्यक्ष छोटे छोटे पत्रकार शब्द पर स्थिति स्पष्ट करें
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के मध्य प्रदेश वन विभाग प्रकोष्ठ के लेटर पैड पर 15 अप्रेल बुधवार को 6 सूत्रीय माँगो को लेकर गुना डिएफो को ज्ञापन सौंपा। उक्त ज्ञापन मे गुना जिले के पत्रकारों पर छोटे छोटे पत्रकारों द्वारा वन विभाग के वन रक्षक व डिप्टियों की खबरों को हाइलाइट करते हुए ब्लैक मेलिंग कर अवेध वसूली करते हैं। इसी के साथ पांच और अन्य मांगे ज्ञापन मे दी गई है। जिसमे मे दूसरे नंबर की माँग मे बताया गया है, वन कर्मियों को पूर्व के अतिक्रमण के चलते सस्पेंड कर दिया जाता है। इस मांग मे राज्य कर्मचारी संघ वन प्रकोष्ठ के ज्ञापन दाता स्वयं यह मानते है वन भूमि पर अतिक्रमण और अवेध उत्खनन मौजूद हैं। और अगर अवेध गतिविधि पहले से उक्त वन क्षेत्रों मे है, तब मौजूदा कर्मियों द्वारा इन अपराधो और अवेध कार्यो की विस्तृत लिखित जानकारी देकर वन अधिकारियों को अवगत कराया गया है? यदि अवगत करा दिया गया तो इसमें वारिष्ठो की ना इंसाफी है… अगर मामलों से लिखित मे देते हुए अवगत नही कराया गया तो दोषी वह स्वयं है। इन दोनों पहलुओ से हटकर भी एक बात बहुत महत्वपूर्ण है, अवेध कार्य किसी के द्वारा या किसी के कार्यकाल के दौरान हुए हो, नुकसान वन संपदा का ही है। वन विभाग द्वारा अक्सर देखने मे आया है ज्यादातर मामलों को पूर्व का मानते हुए संगीन से संगीन मामले पर पर्दा डाल दिया जाता है, जो अनुचित तो है साथ ही अपने दायित्वो के विपरीत है। गुना वन मंडल मे पिछले दिनों तीन वन कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था, जिसके चलते 6 मांगो को लेकर ज्ञापन दिया गया।
छोटे छोटे पत्रकारों के शब्द चयन का क्या आशय?
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ वन विभाग प्रकोष्ठ के ज्ञापन मे छोटे छोटे पत्रकारों का उल्लेख कर वन कर्मियों से अवेध वसूली की बात लिखित मे दी गई है। वन विभाग प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष से जानना चाहते हैं छोटे पत्रकार किसे कहते हैं? क्या वह इंसानी समनता मे छोटे होते हैं? या धन बल मे छोटे होते हैं? या फिर जाती से छोटे होते हैं? जिला अध्यक्ष इसका स्पष्टि करण जरूर दे की छोटे और बड़े पत्रकारों मे क्या असमानताएँ है? इन सबका जवाब लेने के लिए राज्य कर्मचारी संघ वन विभाग प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष (वन रक्षक चेतन वाजपेयी )से जानकारी लेकर उनका पक्ष जानना चाहा पर उनके द्वारा दो बार कॉल कट कर दिया गया।
यहाँ एक और वन विभाग के कर्मचारी राज्य कर्मचारी संघ की आड़ लेकर पत्रकारो पर निशाना साध रहे है, क्या वन विभाग मे छोटी मोटी गड़बड़ी की जाती है? ऐसे दर्जनों मामले है जिसमे वन मंडल गुना मे लाखों करोडो के वित्तीय घोटाले पूर्व से मौजूदा समय मे जारी है। गुना जिले के आठों रेंजो मे प्लांटेशनो मे व्यापक भृस्टाचार स्वतः ही नजर आता है। प्रति वर्ष सेकडो हेक्टेयर वन भूमि पर विभिन्न मदों मे प्लांटेशन वर्किंग कार्य आते हैं। प्लांटेशनो मे चारों और से राशि की बंदर बांट की जाती है, मजदूरों का शोषण किया जाता है, गैर मजदूर वर्ग व वन कर्मियों के रिश्तेदार परिचितों के नाम से फर्जी व्हॉउचार तैयार कर ई पैमेंट मे धांधली की जाती है। खाद मिट्टी मे लाखों रुपए की फर्जी खरीदी की जाती है। जंगली जीवों के शिकार रोधक फंड बलि चड जाता है। मनमाने तरीके से चाहिते रेंजरो को ज्यादा प्लांटेशन वर्क कार्य दिये जाते हैं। वानिकी कार्यो से लेकर कार्य आयोजना मे जमकर काला पिला किया जाता है। सबूतो के साथ एक एक मामले को उजागर किया जायेगा! शिकार प्रकरण,वित्तीय गबन, नियमो के विपरीत कार्य, रिश्तेदारों को फर्जी मजदूर बनाना सहित कई मामलों मे जल्द ही खुलासा किया जायेगा।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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